नारद टेकड़ी से ताप्ती कुंड तक जलागम क्षेत्र का किया जा रहा अध्ययन, बढ़ती आबादी और अवरुद्ध जलमार्गों से जल आवक पर मंडरा रहा संकट
मुलताई। जिला कलेक्टर के निर्देश पर सोमवार को जल संसाधन विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने नारद टेकड़ी से लेकर ताप्ती एवं शनि सरोवर के कैचमेंट एरिया (जलागम क्षेत्र) का विस्तृत सर्वे कार्य प्रारंभ किया। छह सदस्यीय टीम ने नारद टेकड़ी, वन विभाग विश्राम गृह, जनपद पंचायत प्रशिक्षण केंद्र सहित निचले हिस्से के संपूर्ण क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया तथा ताप्ती सरोवर में पहुंचने वाले जल के कैचमेंट एरिया में शामिल खसरा क्रमांकों के अध्ययन का कार्य शुरू किया ।
सर्वे कार्य का नेतृत्व कर रहे जल संसाधन विभाग के प्रभारी एसडीओ शिवकुमार नागले ने बताया कि टोपोशीट क्रमांक 55-K/5 के अनुसार नारद टेकड़ी से ताप्ती कुंड सरोवर तक के कैचमेंट एरिया का मापन कर लिया गया है। इसके साथ ही विलेज मैप पर मार्किंग का कार्य भी प्रगति पर है, जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि जलागम क्षेत्र में कितने खसरा क्रमांक दर्ज हैं तथा उसका कुल क्षेत्रफल कितना है।

उन्होंने बताया कि विभागीय स्तर पर प्राप्त निर्देशों के अनुसार सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के उद्देश्य के संबंध में टीम को कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। हालांकि ताप्ती परिक्रमा क्षेत्र के मंदिरों को ताप्ती ट्रस्ट के अंतर्गत लाने की प्रक्रिया तथा कैचमेंट एरिया के भू-भागों की जानकारी जुटाने को देखते हुए नगर में यह चर्चा है कि भविष्य में ताप्ती क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में यह एक प्रारंभिक कदम हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सर्वे दल में जल संसाधन विभाग के प्रभारी एसडीओ शिवकुमार नागले, एसडीओ दीपेंद्र सूर्यवंशी, सेवानिवृत्त उपयंत्री सी.बी. पाटेकर, टाइमकीपर पी.एन. पंडाग्रे, योगेश पवार तथा राजस्व विभाग से पटवारी सुबोध धुर्वे एवं कोटवार पंकज बचले शामिल रहे।

तेजी से बढ़ी आबादी, बदल रहे हैं ताप्ती के जलमार्ग,
उल्लेखनीय है कि बीते एक दशक में ताप्ती सरोवर के कैचमेंट एरिया में आबादी का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके कारण प्राकृतिक जलमार्ग कहीं अवरुद्ध हो गए हैं तो कहीं उन्होंने अपना मार्ग बदल लिया है। इसका परिणाम यह है कि वर्षाकाल प्रारंभ होते ही पटेल वार्ड एवं ताप्ती वार्ड के अनेक घरों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न होने लगती है। एक ओर वर्षा का पानी घरों और सड़कों पर जमा होकर नागरिकों की परेशानी बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ताप्ती सरोवर में पहुंचने वाले पानी की मात्रा लगातार कम होती जा रही है।

इससे भविष्य में जल उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। जब सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पूछा गया कि बदलते जलमार्गों और घटती जल आवक के कारण क्या भविष्य में ताप्ती सरोवर के समक्ष जल संकट उत्पन्न हो सकता है, तो उनका कहना था कि वर्तमान सर्वे में ताप्ती एवं शनि सरोवर की जल भंडारण क्षमता का आकलन शामिल नहीं है। साथ ही उन्हें सरोवरों की वास्तविक संग्रहण क्षमता संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस विषय में कोई निश्चित टिप्पणी करना संभव नहीं है।

नागरिकों ने उठाई व्यापक सर्वे की मांग,
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि केवल कैचमेंट एरिया का सर्वे पर्याप्त नहीं है। ताप्ती एवं शनि सरोवर की वास्तविक जल संग्रहण क्षमता तथा वर्षों के दौरान घटती जल आवक का वैज्ञानिक अध्ययन भी कराया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे भविष्य में संभावित जल संकट का सही आकलन किया जा सकेगा तथा समय रहते जल संरक्षण और सरोवरों के पुनर्जीवन की प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकेंगी। ताप्ती उद्गम क्षेत्र और उससे जुड़े जलमार्गों के संरक्षण को लेकर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा चिंता व्यक्त की जाती रही है। ऐसे में शुरू हुआ यह सर्वे आने वाले समय में ताप्ती क्षेत्र के संरक्षण, विकास और प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


