संजय द्विवेदी असलम अहमद
‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ महासम्मेलन में राष्ट्रपति ने किया संबोधित, जनजातीय जीवन मूल्यों और प्रकृति संरक्षण की सराहना
बैतूल। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक विरासत के लिए पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। वे ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ महासम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। इस ऐतिहासिक एवं गरिमामयी आयोजन में राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की जीवनशैली, प्रकृति के प्रति उनकी आस्था तथा आध्यात्मिक मूल्यों की विशेष सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज को आदिवासी और वनवासी दोनों नामों से जाना जाता है। यह समाज सृष्टि के आरंभ से ही प्रकृति के निकट रहकर सरल, शांतिपूर्ण और प्रेमपूर्ण जीवन जीता आया है। जनजातीय समुदाय हिंसा से दूर रहकर सुख, शांति और आनंद के साथ जीवन व्यतीत करना जानता है। उन्होंने कहा कि यह समाज प्रकृति और पंचतत्वों के प्रति गहरी श्रद्धा रखता है, जो भारतीय संस्कृति की मूल भावना का प्रतीक है।

महासम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री डी.डी. उइके, जिले के प्रभारी एवं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आध्यात्मिक शांति से ही जीवन में सुख और सद्भाव संभव : मंगुभाई पटेल
इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान को इतने विशाल एवं सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि जीवन में शांति का होना अत्यंत आवश्यक है। जब मन शांत होता है, तब व्यक्ति के भीतर धार्मिक और सकारात्मक भावनाओं का विकास होता है, जिससे समाज में सद्भाव और समरसता स्थापित होती है।
राष्ट्रपति के रूप में मिला जनजातीय समाज को सर्वोच्च सम्मान : डी.डी. उइके
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री एवं सांसद डी.डी. उइके ने कहा कि देश को स्वतंत्र हुए कई दशक बीत गए, लेकिन लंबे समय तक जनजातीय समाज को सर्वोच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिला। पहली बार देश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के रूप में जनजातीय समाज से आने वाली एक ऐसी व्यक्तित्व प्राप्त हुई हैं, जिन्होंने पूरे समाज को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति के प्रथम बैतूल आगमन पर कार्यक्रम स्थल पर गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत कर उनका स्वागत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत की झलक प्रस्तुत की।

‘एक वृक्ष मां के नाम’ अभियान के तहत किया रुद्राक्ष का पौधरोपण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने “एक वृक्ष मां के नाम” अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधरोपण किया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ बैतूल केंद्र की प्रभारी मंजू दीदी ने राष्ट्रपति को शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल संचालन के लिए मंजू दीदी, शैलजा दीदी तथा कार्यक्रम से जुड़े आयोजकों की सराहना की।
जनजातीय महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की राष्ट्रपति ने की प्रशंसा,

लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित महासम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न प्रदर्शनी एवं स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने विशेष रूप से मोटे अनाज एवं अन्य खाद्य पदार्थों से तैयार 18 प्रकार के पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और उनकी सराहना की। राष्ट्रपति ने गौशालाओं द्वारा निर्मित उत्पादों सहित अन्य स्टॉलों का भी अवलोकन किया तथा उत्पाद तैयार करने वाले समूहों और जनजातीय महिलाओं को निरंतर आगे बढ़ने एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रपति के प्रथम बैतूल आगमन पर हुआ आत्मीय एवं गरिमामय स्वागत,
हेलीपेड परिसर में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किया अभिनंदन भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रथम बैतूल आगमन पर हेलीपेड परिसर में उनका गरिमामय एवं आत्मीय स्वागत किया गया। मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री डी.डी. उइके, प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति महोदया का अभिनंदन किया।
इसके अतिरिक्त घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा उइके, भैंसदेही विधायक महेंद्र सिंह चौहान, मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख तथा आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने भी पुष्पगुच्छ भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। प्रोटोकॉल के अनुसार अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे तथा पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने राष्ट्रपति का स्वागत कर उनका अभिवादन किया।

ऐतिहासिक रहा बैतूल का यह आयोजन ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के तत्वावधान में आयोजित यह महासम्मेलन न केवल आध्यात्मिक चेतना का संदेश देने वाला बना, बल्कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करने वाला ऐतिहासिक अवसर भी सिद्ध हुआ।

