35 वर्षों से निःशुल्क तर्पण करा रहे पंडित गणेश त्रिवेदी, पितृपक्ष में दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु, तर्पण समिति निःशुल्क उपलब्ध कराती है सामग्री ,
असलम अहमद
मुलताई। सूर्यपुत्री मां ताप्ती का तट धार्मिक और पौराणिक आस्थाओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान यहां देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और पूर्वजों के निमित्त तर्पण एवं पिंडदान करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां ताप्ती के पवित्र जल में तर्पण करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पंडित गणेश त्रिवेदी पिछले करीब 35 वर्षों से ताप्ती तट पर श्रद्धालुओं को निःशुल्क तर्पण की विधि कराते आ रहे हैं। यह परंपरा उनके पिता पंडित दुर्गा शंकर त्रिवेदी ने लगभग 35 वर्ष पहले शुरू की थी। पिता के बाद गणेश त्रिवेदी इस सेवा और परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।
पितृपक्ष के दौरान सूर्योदय के साथ ही ताप्ती तट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है। सैकड़ों लोग अपने पितरों के निमित्त तर्पण करते हैं। वहीं तट पर पंडितों के मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है। पंडित गणेश त्रिवेदी के अनुसार, सूर्यपुत्री मां ताप्ती के तट पर तर्पण और पिंडदान का धार्मिक महत्व पुराणों में वर्णित है। मान्यता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों और देवी-देवताओं ने भी ताप्ती तट पर अपने पितरों के निमित्त तर्पण एवं पिंडदान किया था।

शहीद जवानों से लेकर पशु-पक्षियों तक के लिए करते हैं तर्पण,
पंडित गणेश त्रिवेदी बताते हैं कि पितृपक्ष के दौरान ताप्ती तट पर केवल परिवार के दिवंगत सदस्यों के लिए ही नहीं, बल्कि देश के लिए शहीद हुए जवानों, मित्रों, शत्रुओं तथा पशु-पक्षियों और गौवंश के निमित्त भी तर्पण किया जाता है। उनका कहना है कि श्रद्धा और धार्मिक मान्यता के अनुसार तर्पण के माध्यम से पितरों की तृप्ति और उनकी शांति की कामना की जाती है। श्रद्धालु अपने माता-पिता, दादा-दादी और पूर्वजों का ताप्ती जल से तर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

तर्पण समिति उपलब्ध कराती है निःशुल्क सामग्री,
पितृपक्ष के दौरान ताप्ती तट पर आने वाले श्रद्धालुओं को तर्पण के लिए आवश्यक सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। ताप्ती तर्पण समिति द्वारा तिल, जौ, चावल, फूल, दूध, कुश सहित अन्य आवश्यक सामग्री श्रद्धालुओं को दी जाती है। पंडित गणेश त्रिवेदी बताते हैं कि श्रद्धालुओं को तर्पण के लिए अपने साथ केवल एक तांबे का लोटा लेकर आने की आवश्यकता होती है। बाकी आवश्यक सामग्री समिति की ओर से उपलब्ध कराई जाती है।
भोपाल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा सहित ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचते हैं लोग,
पितृपक्ष के दौरान मुलताई के ताप्ती तट पर भोपाल, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा सहित बैतूल जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई परिवार वर्षों से यहां आकर अपने पितरों का तर्पण करते आ रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था है कि मां ताप्ती के पवित्र तट पर विधि-विधान से तर्पण करने से उन्हें पुण्य लाभ प्राप्त होता है और दिवंगत पूर्वजों के प्रति अपनी धार्मिक जिम्मेदारी पूरी करने का अवसर मिलता है। निःशुल्क तर्पण व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में ताप्ती तर्पण समिति से जुड़े कई लोग सहयोग करते हैं। इनमें रितेश परिहार, विजय शुक्ला, महेश खत्री, हरीश पटेल, रमेश चंद पांडे, ओमप्रकाश मिश्रा, नीरज अग्रवाल और राधेश्याम अग्रवाल प्रमुख रूप से शामिल हैं।m इसके अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को तर्पण सामग्री उपलब्ध कराने तथा कुश की अंगूठियां तैयार कर उपलब्ध कराने में सपन बंगाली, अरुण पंडाग्रे, कृष्ण राव और गोलू पाटेकर सहित अन्य लोग भी सहयोग करते हैं।
आस्था और सेवा की परंपरा बनी पहचान,
मां ताप्ती के तट पर पितृपक्ष के दौरान होने वाला तर्पण धार्मिक आस्था के साथ सेवा की भावना का भी उदाहरण बनता है। पंडित गणेश त्रिवेदी और ताप्ती तर्पण समिति द्वारा वर्षों से निःशुल्क तर्पण और सामग्री उपलब्ध कराने की यह परंपरा लगातार जारी है। सूर्योदय के समय ताप्ती तट पर एक साथ होने वाले तर्पण, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान यहां के आध्यात्मिक वातावरण को और विशेष बना देते हैं।

