पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे सहित गणमान्य नागरिक रहे शामिल, गायत्री परिवार ने यज्ञ के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर किया प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को दिए संस्कारों के संदेश,
मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई स्थित वसंत पब्लिक स्कूल (वीआईपी) परिसर में पंचकुंडीय महायज्ञ का भव्य, गरिमामय एवं आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे, विद्यालय के मार्गदर्शक दिलीप डांगे, डायरेक्टर डॉ. मधु पांसे, सचिव प्रदीप डांगे, विद्यालय परिवार, छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।महायज्ञ का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाजों एवं मंत्रोच्चार के साथ हुआ।

विद्वान आचार्यों द्वारा संपन्न कराए गए धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पूरा विद्यालय परिसर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर राष्ट्र की समृद्धि, समाज में सुख-शांति, पर्यावरण संरक्षण तथा समस्त मानवता के कल्याण की मंगलकामना की। यज्ञ की दिव्य अग्नि एवं वैदिक मंत्रों की स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमुदाय को आध्यात्मिक अनुभूति से अभिभूत कर दिया। इस अवसर पर गायत्री परिवार के उप जोन समन्वयक एवं वेदमाता गायत्री ट्रस्ट के व्यवस्थापक रामचंद्र गायकवाड़ ने प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है।
उन्होंने गायत्री साधना एवं यज्ञ के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक तथा सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ व्यक्ति के विचारों एवं संस्कारों का भी परिष्कार करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सेवा भावना और भारतीय संस्कृति के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण,
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित इस संस्कारमूलक एवं आध्यात्मिक आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास भी अत्यंत आवश्यक है। पंचकुंडीय महायज्ञ जैसे आयोजन विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों एवं आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। पूरे आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर श्रद्धा, अनुशासन, वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण से सराबोर रहा



