बाल विज्ञान कॉन्फ्रेंस में बाल वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किए नवाचार और शोधपरक प्रोजेक्ट,

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मुलताई। स्कूली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और उनमें स्वयं प्रयोग कर नए नवाचार करने की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। 3 नवंबर, मंगलवार को न्यू कार्मल कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में जिले के विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे 45 बाल वैज्ञानिकों ने अपनी परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण कर वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता का परिचय दिया। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, नई दिल्ली (भारत सरकार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, मध्य प्रदेश शासन, शिक्षा विभाग तथा साइंस सेंटर भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने ‘सततता के लिए विज्ञान एवं नवाचार’ विषय पर आधारित अपनी परियोजनाएं प्रस्तुत कीं।

इन परियोजनाओं में विद्यार्थियों ने अपने आसपास की स्थानीय समस्याओं को चिन्हित कर विज्ञान और तकनीक के माध्यम से उनके समाधान खोजने का प्रयास किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं देश के महान वैज्ञानिक के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग वत्सला शिवहरे, जिला शिक्षा अधिकारी सुश्री पूनम वरकड़े, महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. बी.आर. बारस्कर तथा न्यू कार्मल कॉन्वेंट स्कूल की प्राचार्य विनीता नायर प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी सुश्री पूनम वरकड़े ने कहा कि वर्तमान समय में स्कूली विद्यार्थियों के बीच विज्ञान विषय को रुचिकर बनाने के लिए प्रायोगिक विज्ञान को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय विद्यार्थियों को प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान को समझने के अवसर मिलने चाहिए। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करते हैं और उन्हें स्वयं कुछ नया सोचने, प्रयोग करने तथा नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग वत्सला शिवहरे ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिले के लगभग 300 से अधिक विद्यार्थियों ने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी रुचि प्रदर्शित की है। यह विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। उन्होंने बाल वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि विज्ञान को समझना और अपने ज्ञान एवं नवाचार के माध्यम से उसे समाज के लिए उपयोगी बनाना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है। स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए बच्चों द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉन्फ्रेंस के जिला समन्वयक आनीष नायर ने आयोजन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि यह कॉन्फ्रेंस प्रतिवर्ष जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जाती है। इसमें 10 से 13 वर्ष तथा 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली विद्यार्थी निर्धारित विषय के अनुसार लगभग दो महीने तक अपने आसपास की स्थानीय समस्याओं का अध्ययन करते हैं और उनके समाधान पर आधारित परियोजनाएं तैयार करते हैं। जिला स्तर पर प्रस्तुत परियोजनाओं में से जूनियर एवं सीनियर समूह से पांच-पांच उत्कृष्ट परियोजनाओं का चयन महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं स्थानीय वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है। इन परियोजनाओं को आगे की जांच एवं स्क्रीनिंग के लिए भोपाल स्थित संबंधित कार्यालय भेजा जाता है। वहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीनियर समूह से तीन तथा जूनियर समूह से दो परियोजनाओं का चयन किया जाता है। चयनित विद्यार्थी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में अपनी परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण करते हैं।

राज्य स्तर पर भेजी जाने वाली परियोजनाओं का अंतिम चयन 20 नवंबर तक किया जाएगा। इसके बाद चयनित विद्यार्थियों एवं संबंधित विद्यालयों को जिला स्तर पर इसकी सूचना दी जाएगी। आयोजन में बैतूल बाजार, घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, रानीपुर, मुलताई, साईंखेड़ा, सोनोरा, चिचोली एवं आमला सहित जिले के विभिन्न विकासखंडों में संचालित शासकीय और अशासकीय विद्यालयों के बाल वैज्ञानिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ नए विचारों और नवाचारों को सामने लाने का अवसर मिला।

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