नौ साल पुराने बिजली बिल विवाद में बिजली कंपनी के पक्ष में फैसला,वाद दायर करने की तारीख से 9% सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा,
मुलताई। मुलताई की वरिष्ठ खंड न्यायाधीश अदालत ने करीब नौ साल पुराने बिजली बिल विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पक्ष में निर्णय दिया है। अदालत ने मेसर्स आदिश्वर ऑयल एंड फैट्स लिमिटेड से 52 लाख 18 हजार 878 रुपए की बकाया राशि वसूलने का अधिकार विद्युत वितरण कंपनी को दिया है। इस राशि में ऊर्जा प्रभार एवं ऑडिट से संबंधित राशि शामिल है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि बकाया राशि पर वाद दायर किए जाने की तारीख से वास्तविक वसूली की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देय होगा। इस फैसले से विद्युत वितरण कंपनी के बकाया वसूली के दावे को न्यायालयीन आधार मिला है।
2017 में दायर हुआ था वसूली का मामला,
अधिवक्ता प्रवीण माने के अनुसार, यह मामला आरसीएसबी क्रमांक 01/2017 से संबंधित था। मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा मेसर्स आदिश्वर ऑयल एंड फैट्स लिमिटेड के खिलाफ बकाया बिजली राशि की वसूली के लिए न्यायालय में वाद दायर किया गया था। मामले में भारतीय स्टेट बैंक तथा बैतूल के वाणिज्यिक कर अधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया था।

1994 में लिया था हाई-टेंशन कनेक्शन,
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, मेसर्स आदिश्वर ऑयल एंड फैट्स लिमिटेड ने वर्ष 1994 में हाई-टेंशन विद्युत कनेक्शन लिया था। कंपनी की ओर से बिजली बिल की राशि का भुगतान नहीं किए जाने के कारण मार्च 2011 तक बकाया राशि जमा हो गई थी।
बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर विद्युत विभाग द्वारा 29 अप्रैल 2011 को कंपनी का विद्युत कनेक्शन अस्थायी रूप से विच्छेदित कर दिया गया था। इसके बाद भी बकाया राशि जमा कराने के लिए कंपनी को कई बार नोटिस जारी किए गए। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर 5 अक्टूबर 2011 को विद्युत कनेक्शन स्थायी रूप से विच्छेदित कर दिया गया।

ऊर्जा प्रभार और ऑडिट राशि को लेकर भी हुआ विवाद,
मामले में ऊर्जा प्रभार एवं ऑडिट से संबंधित राशि को लेकर भी विवाद सामने आया था। इस संबंध में उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के समक्ष भी कार्रवाई हुई। बाद में विद्युत वितरण कंपनी ने बकाया राशि की वसूली के लिए न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद विद्युत वितरण कंपनी के दावे को स्वीकार किया। अदालत ने माना कि कंपनी को आदिश्वर ऑयल एंड फैट्स लिमिटेड से 52,18,878 रुपए की बकाया राशि वसूलने का अधिकार है।
बैंक और वाणिज्यिक कर अधिकारी के खिलाफ राहत नहीं,
हालांकि, न्यायालय ने मामले में भारतीय स्टेट बैंक तथा बैतूल के वाणिज्यिक कर अधिकारी के खिलाफ मांगी गई राहत को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन पक्षकारों से सीधे बकाया बिजली राशि की वसूली का दावा इस न्यायालय के समक्ष स्वीकार्य नहीं है।
इस प्रकार न्यायालय ने विद्युत वितरण कंपनी के बकाया राशि संबंधी दावे को स्वीकार करते हुए आदिश्वर ऑयल एंड फैट्स लिमिटेड से मूल बकाया राशि के साथ निर्धारित अवधि का 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज वसूलने का अधिकार दिया है।

