किसानों के हक के पानी पर निजी कंपनी का कब्जा .? 

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मुलताई। मुलताई क्षेत्र की महत्वाकांक्षी वर्धा सिंचाई परियोजना का लाभ किसानों को पर्याप्त रूप से मिलने के बजाय निजी ब्लूबेरी कंपनी को जलाशय से पानी उपलब्ध कराए जाने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। वर्धा जलाशय के आसपास के किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि जलाशय में पानी की उपलब्धता कम होने के बावजूद निजी कंपनी को पानी दिया जा रहा है, जबकि सिंचाई के लिए जलाशय पर निर्भर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

हाल ही में ग्राम पंचायत बोरगांव शेरगढ़ के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर वर्धा जलाशय शेरगढ़ से निजी ब्लूबेरी कंपनी को दिए जा रहे पानी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब जलाशय में जलभराव कम है और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, तो ऐसी स्थिति में निजी कंपनी को पानी उपलब्ध कराना उचित नहीं है।

इस मामले में ग्राम पंचायत बोरगांव शेरगढ़ ने भी पहल करते हुए पंचायत में प्रस्ताव पारित किया है। पंचायत ने वर्धा जलाशय से डहरगांव स्थित निजी ब्लूबेरी कंपनी को उपलब्ध कराए जा रहे पानी पर रोक लगाने की मांग की है। पंचायत का यह प्रस्ताव भी जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के साथ प्रस्तुत किया गया।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि ग्राम पंचायत शेरगढ़ क्षेत्र में स्थित वर्धा जलाशय से निजी ब्लूबेरी कंपनी को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। दूसरी ओर, जलाशय में जलभराव कम होने के कारण लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से खेती करने वाले किसानों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, बिजली कंपनी द्वारा लिफ्ट सिंचाई से जुड़े किसानों के बिजली कनेक्शन काटे जाने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के बजाय निजी कंपनी को जलाशय से पानी दिए जाने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्धा जलाशय के आसपास के किसान पिछले दो वर्षों से निजी ब्लूबेरी कंपनी को दिए जा रहे पानी पर रोक लगाने की मांग करते आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि जलाशय का निर्माण और सिंचाई परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में जलाशय में पानी सीमित रहने की स्थिति में किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें और मांगें उठाई जा चुकी हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई है। किसानों का कहना है कि यदि सिंचाई के पानी के वितरण में उनकी जरूरतों की अनदेखी होती रही, तो आगामी रबी सीजन में फसलों की बुवाई और सिंचाई प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों के स्तर पर उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। हालांकि, पानी के आवंटन और वितरण से संबंधित विभागीय पक्ष तथा निजी कंपनी को पानी उपलब्ध कराने के नियमों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जलाशय में उपलब्ध पानी का आकलन कर किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। साथ ही, निजी कंपनी को पानी उपलब्ध कराने के निर्णय की समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जलाशय के सीमित जलसंग्रह की स्थिति में किसानों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, जिला कलेक्टर ने ज्ञापन प्राप्त करने के बाद निजी ब्लूबेरी कंपनी को वर्धा जलाशय से दिए जा रहे पानी के संबंध में रोक लगाने की मांग पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाएगा और सिंचाई के पानी को लेकर राहत प्रदान करेगा। हालांकि, ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कलेक्टर के आश्वासन के बाद वास्तव में क्या कार्रवाई होती है। क्या संबंधित विभाग जलाशय में उपलब्ध पानी और उसके वितरण की समीक्षा करेगा? क्या किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी? या फिर यह मामला भी पहले की शिकायतों की तरह कागजों तक सीमित रह जाएगा? इन सवालों के जवाब प्रशासन की आगामी कार्रवाई से ही स्पष्ट होंगे। ग्रामीणों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और किसानों की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी होगा कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करे और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले।

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