ताप्ती लोक की राह में 17 जर्जर दुकानें बनीं बड़ी चुनौती,

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मुलताई। सूर्यपुत्री मां ताप्ती की जन्मस्थली मुलताई में बहुप्रतीक्षित ताप्ती लोक निर्माण की प्रक्रिया अब प्रारंभ हो गई है। इसके साथ ही ताप्ती परिक्रमा क्षेत्र, ताप्ती सरोवर और शनि सरोवर के समग्र एवं व्यापक विकास तथा सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार करने के लिए सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया गया है। ऐसे में वर्षों से ताप्ती तट पर जर्जर अवस्था में खड़ी नगर पालिका की 17 दुकानों का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख चुनौती के रूप में सामने आया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ताप्ती सरोवर के सर्वांगीण विकास और सौंदर्यीकरण की योजना इन जर्जर दुकानों के रहते प्रभावी रूप से मूर्त रूप ले सकेगी? अथवा वर्षों से विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अटकी इन दुकानों का कोई सौहार्दपूर्ण एवं स्थायी समाधान निकालकर ताप्ती तट को विकास के लिए पूरी तरह मुक्त किया जाएगा। ताप्ती तट पर स्थित इन 17 दुकानों को पिछले एक दशक में कई बार हुई जांच में जर्जर, कंडम और संभावित रूप से खतरनाक बताया जा चुका है। वहीं हाईकोर्ट के निर्णय के आधार पर जिला कलेक्टर द्वारा 90 दिन की समयसीमा में इन दुकानों को हटाने के आदेश दिए जाने के कई महीने बाद भी दुकानें आज तक यथावत खड़ी हैं।

नगरवासियों का कहना है कि मुख्य मार्ग से ताप्ती सरोवर और इसके आसपास स्थित मंदिरों का वैभव एवं धार्मिक स्वरूप स्पष्ट रूप से दिखाई दे, इसके लिए वर्षों पहले निर्मित हो चुकी इन जर्जर दुकानों को हटाना जरूरी है। हालांकि उनका यह भी मानना है कि दुकानदारों के साथ बातचीत कर उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराते हुए सौहार्दपूर्ण वातावरण में सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है।

ताप्ती तट पर बनी 17 दुकानों की जर्जर स्थिति को लेकर पिछले कई वर्षों से प्रशासन और नगर पालिका स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। प्रदेश में जब भी किसी जर्जर भवन अथवा निर्माण के गिरने से बड़ी दुर्घटना होती है, उसके बाद इन दुकानों की स्थिति की जांच भी कराई जाती रही है। बीते करीब एक दशक में इन दुकानों की कई बार जांच की जा चुकी है और प्रत्येक बार इनके निर्माण की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। 17 जुलाई 2021 को नगर पालिका एवं लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम ने भी इन 17 दुकानों का निरीक्षण किया था।

निरीक्षण के दौरान स्थिति इतनी जर्जर बताई गई थी कि दुकानों में बांस लगाने के दौरान ही छत का हिस्सा टूटने लगा था। जांच दल में शामिल तत्कालीन लोक निर्माण विभाग के एसडीओ ए.के. जैन ने बताया था कि दुकानों के निर्माण की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने बताया था कि बांस लगाने से ही छत टूट रही है। निर्माण में उपयोग किया गया 10 एमएम का लोहा भी जंग लगने के कारण लगभग 2 एमएम तक रह गया है। ऐसी स्थिति में इन दुकानों में किसी गंभीर हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद अब तक इन दुकानों को हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी इन दुकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होती है, किसी न किसी कारण से मामला आगे नहीं बढ़ पाता। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इच्छाशक्ति के अभाव के चलते यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हालांकि अब परिस्थितियां बदल रही हैं। एक ओर ताप्ती लोक निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर ताप्ती परिक्रमा क्षेत्र, ताप्ती सरोवर और शनि सरोवर के सौंदर्यीकरण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। ऐसे में ताप्ती तट की इन 17 दुकानों का स्थायी समाधान करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। यदि समय रहते इन दुकानों का समाधान नहीं किया गया तो एक ओर ताप्ती लोक की विकास योजना प्रभावित हो सकती है, वहीं दूसरी ओर जर्जर निर्माण के कारण किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका भी बनी रहेगी।

ताप्ती सरोवर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि मुलताईवासियों की धार्मिक आस्था और नगर की पहचान का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे मां ताप्ती का उद्गम स्थल और ताप्ती कुंड माना जाता है। यहीं से मां ताप्ती तीन राज्यों को सुख, समृद्धि और जीवनदायिनी जलधारा प्रदान करने के लिए आगे बढ़ती हैं। यही कारण है कि ताप्ती सरोवर और इसके आसपास के क्षेत्र के विकास एवं सौंदर्यीकरण को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है।

लेकिन जब भी ताप्ती तट के सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना की बात आती है, ये 17 दुकानें सबसे बड़ी अड़चन के रूप में सामने आती हैं। बताया जाता है कि निर्माण के समय जिन लोगों को ये दुकानें आवंटित की गई थीं, उनमें से अधिकांश व्यापारी अब बदल चुके हैं। कई दुकानदारों ने अपना व्यवसाय अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर लिया है, जबकि कुछ दुकानें किराए पर संचालित हो रही हैं।ऐसे में स्थानीय लोगों का मानना है कि दुकानदारों और नगर प्रशासन के बीच संवाद स्थापित कर इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। दुकानदार भी ताप्ती सरोवर की धार्मिक महत्ता को देखते हुए विकास कार्य का विरोध नहीं करना चाहते, लेकिन उनकी प्रमुख मांग है कि उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराकर व्यवस्थित रूप से पुनर्वासित किया जाए।

ताप्ती लोक की प्रस्तावित विकास योजना से मुलताई के धार्मिक और पर्यटन महत्व को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। ऐसे में ताप्ती तट की 17 जर्जर दुकानों को लेकर अब नगर प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर संभावित दुर्घटना को रोकना और दूसरी ओर ताप्ती सरोवर के सौंदर्यीकरण एवं विकास में आ रही बाधा को दूर करना। यदि प्रशासन व्यापारियों के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध करा देता है तो वर्षों पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है। इसके साथ ही ताप्ती सरोवर का तट अधिक सुंदर, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा तथा मुख्य मार्ग से ताप्ती सरोवर एवं मंदिरों का धार्मिक वैभव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकेगा।

“17 दुकानों का शीघ्र ही समाधान निकाला जाएगा। दुकानों को हस्तांतरित करने के लिए नगर पालिका द्वारा भूमि की तलाश की जा रही है। 17 दुकानों के निर्माण के लिए टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है। भूमि उपलब्ध होते ही इस समस्या का सकारात्मक समाधान निकाल लिया जाएगा।”
वीरेंद्र तिवारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, मुलताई

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