बाल स्वरूप श्रीराम के दर्शन कर भावविभोर हुए श्रद्धालु, गांधी चौक के रामलीला मंच पर श्रीराम जन्म और ताड़का वध का हुआ मंचन, चार वर्षीय वसु पौनीकर निभा रहे बाल श्रीराम की भूमिका,
मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई की 122 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा रामलीला का शुभारंभ दशहरा पर्व से हो गया। गांधी चौक स्थित रामलीला मंच पर पहले दिन भगवान श्रीराम के जन्म और राक्षसी ताड़का वध का आकर्षक मंचन किया गया। इस दौरान कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्रीरामलीला मंडली के वरिष्ठ कलाकार बालकिशन चंदेल, निर्मल मिश्रा एवं विष्णु अग्रवाल ने बताया कि मुलताई में पिछले 122 वर्षों से गांधी चौक पर रामलीला का मंचन किया जा रहा है। यह नगर की सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की अमूल्य विरासत है, जिसे वर्तमान पीढ़ी के युवा पूरे सम्मान और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
रामलीला के पहले दिन भगवान श्रीराम के जन्म का सुंदर मंचन किया गया। मंडली के सबसे कम उम्र के कलाकार चार वर्षीय वसु पौनीकर ने बाल स्वरूप श्रीराम की भूमिका निभाई। रामलीला के सूत्रधार बंटी मिश्रा ने बताया कि वसु पौनीकर महज 16 महीने की उम्र से ही बाल श्रीराम की भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनकी प्रस्तुति दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मंचन के दौरान भगवान विष्णु के धरती पर श्रीराम के रूप में अवतार लेने की कथा प्रस्तुत की गई। मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने धरती को राक्षसों के अत्याचारों से मुक्त कराने के लिए राजा दशरथ के कुल में जन्म लिया था। राजा दशरथ की भूमिका एडवोकेट जी.जी. घोड़े ने निभाई। गुरु वशिष्ठ एवं विश्वामित्र से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम द्वारा राक्षसी ताड़का के वध का प्रसंग भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

के भाष्यकार पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि इस वर्ष रामलीला में पंडित राहुल शर्मा भगवान श्रीराम, पंडित अमृत त्रिवेदी लक्ष्मण, चेतन मिश्रा भरत और वीर चंदेल शत्रुघ्न की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा कृष्णा अग्रवाल सहित अन्य बाल कलाकार भी विभिन्न पात्रों का अभिनय कर रहे हैं। रामलीला के माध्यम से नगर की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। मंडली की ओर से निक्की मिश्रा ने धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में गांधी चौक पहुंचकर रामलीला का आनंद लेने और इस ऐतिहासिक परंपरा को प्रोत्साहित करने की अपील की है।


