दशकों के इंतजार के बाद शुरू हुआ शनि सरोवर घाटों का जीर्णोद्धार,

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मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई के छोटे तालाब के रूप में प्रसिद्ध शनि सरोवर के घाटों के जीर्णोद्धार का कार्य आखिरकार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद प्रारंभ हो गया है। लगभग 25 लाख रुपए की लागत से होने वाले इस निर्माण कार्य के तहत सरोवर के जर्जर घाटों का नव निर्माण किया जाएगा। कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के उद्देश्य से ठेकेदार द्वारा सोमवार से सरोवर से पानी निकासी का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

नगरवासियों द्वारा बीते कई दशकों से लगातार छोटे तालाब के क्षतिग्रस्त घाटों के पुनर्निर्माण की मांग की जा रही थी। हर वर्ष बारिश का मौसम शुरू होने से पहले नागरिकों की चिंता बढ़ जाती थी, क्योंकि जर्जर घाटों के अतिवृष्टि के दौरान ढहने का खतरा लगातार बना रहता था। घाटों की खराब स्थिति से आसपास के रहवासी और श्रद्धालु भी परेशान थे। अब निर्माण कार्य प्रारंभ होने से लोगों में राहत और उम्मीद का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नगर पालिका के अन्य कार्यों की तरह यह परियोजना भी राजनीति और अनियमितताओं की भेंट नहीं चढ़ी, तो शनि सरोवर के जल प्रवाह क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकेगी।

शनि सरोवर घाटों की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा लंबे समय से आवाज उठाई जा रही थी। इस मुद्दे को हरिभूमि ने भी प्रमुखता से प्रकाशित कर शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने लगातार रखा। आखिरकार अब इस दिशा में ठोस पहल होने से लोगों को उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।

तटबंध, सीढ़ियां और ग्रेनाइट-रेड स्टोन से होगा सौंदर्यीकरण, सरोवर के ऊपर स्टील रेलिंग भी लगाई जाएगी। शनि सरोवर घाट निर्माण कार्य का ठेका मां अंबे कंस्ट्रक्शन, भिंड को दिया गया है। ठेकेदार बल्लू दुबे को लगभग 155 मीटर लंबे घाट निर्माण का कार्य 45 दिनों के भीतर पूर्ण करना होगा। उपयंत्री महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्माण कार्य के अंतर्गत रिटेनिंग वॉल, सीढ़ियों और कॉटन वॉल का निर्माण किया जाएगा। साथ ही घाट और दीवारों पर ग्रेनाइट एवं रेड स्टोन लगाए जाएंगे, जिससे सरोवर क्षेत्र का सौंदर्य भी बढ़ेगा।

इसके अलावा सरोवर मार्ग के किनारों पर पेवर ब्लॉक लगाने का भी प्रावधान किया गया है। समय पर कार्य प्रारंभ होने से यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा हो सकेगा। हालांकि नगर के लोगों में इस बात को लेकर चिंता भी बनी हुई है कि 17 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित ताप्ती सरोवर के स्लूस गेट निर्माण कार्य का ठेका होने के बावजूद अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका है।

मुलताई नगर में बीते एक दशक के दौरान करोड़ों रुपए की अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं या तो अधूरी रह गईं या फिर अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। लगभग 22 करोड़ रुपए खर्च होने और बांध में पर्याप्त जल क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद आज भी नगरवासियों को नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि लोगों को दो दिन के अंतराल के बाद चौथे दिन पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार करोड़ों रुपए पाइपलाइन विस्तार कार्य पर खर्च किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर पाइपलाइन का भौतिक सत्यापन तक नहीं किया गया। ठेकेदारों को करोड़ों रुपए का भुगतान तो हुआ, किंतु भुगतान के अनुसार पाइपलाइन की खोज कभी नहीं हुई। 6 करोड़ रुपए की सीवर लाइन परियोजना के कारण लगभग 15 करोड़ रुपए की सड़कों को खोद दिया गया। नगरपालिका परिसर के सामने सीवर लाइन प्रोजेक्ट का ठेकेदार गड्ढा खोदकर गायब हो गया।

इसी तरह करोड़ों रुपए की लागत से विकसित सूर्य नारायण सरोवर भी अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाया है। स्थिति यह है कि सरोवर में दो माह पहले से ही चिड़ियों के पीने तक के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि निर्माण के दौरान सरोवर का आकार छोटा कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि सरोवर का निर्माण लगभग 25 वर्ष पूर्व हुआ था, जबकि आसपास की अवैध कॉलोनियों का निर्माण पिछले 15 वर्षों में हुआ है। यही कारण है कि सरोवर की सीमा कम होने को लेकर तरह-तरह की जनचर्चाएं व्याप्त हैं। संजीवनी क्लीनिक और कन्या शाला भवन वर्षों से अधूरे पड़े हैं। अनेक सड़क निर्माण कार्य आधे-अधूरे होकर दम तोड़ चुके हैं। ऐसे में नगरवासियों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास योजनाओं के नाम पर दिखाए गए सपने आखिर कब धरातल पर उतरेंगे और जनता के लिए वास्तविक राहत बनेंगे।
इनका कहना
“शनि सरोवर घाट निर्माण का कार्य आज से प्रारंभ हो गया है। ठेकेदार को 45 दिनों में कार्य पूर्ण करना है। कार्य गुणवत्तापूर्ण हो और निर्धारित समय सीमा में पूरा हो, इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।”
— महेश शर्मा, उपयंत्री, नगर पालिका मुलताई

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