जहां बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए, वहीं हर सज जाता है बाजार .!

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मुलताई। ग्राम बोदल पठार में प्रत्येक शनिवार को लगने वाला साप्ताहिक बाजार इन दिनों विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार के लिए स्कूल परिसर का उपयोग किए जाने से जहां विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है, वहीं बाजार के दौरान होने वाली भीड़भाड़ और वाहनों की आवाजाही के चलते स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार को साप्ताहिक बाजार लगने के दौरान स्कूल परिसर में बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें लग जाती हैं।

इससे विद्यालय परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक चहल-पहल और भीड़ दिखाई देती है। बाजार में आने वाले लोगों की आवाजाही के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान व्यवधान का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय परिसर मूल रूप से बच्चों की शिक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए निर्धारित है, ऐसे में वहां नियमित रूप से बाजार लगना उचित नहीं है।

ग्रामीणों ने बताया कि साप्ताहिक बाजार केवल स्कूल परिसर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गांव के मुख्य मार्ग के आसपास भी बाजार की गतिविधियां दिखाई देती हैं। शनिवार को बाजार के दौरान पैदल आने-जाने वाले लोगों के साथ दोपहिया और अन्य वाहनों की आवाजाही भी बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क पर भीड़भाड़ की स्थिति बनती है। विशेषकर स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के समय यदि बाजार की भीड़ और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है तो दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के आसपास बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बाजार के लिए व्यवस्थित और सुरक्षित स्थान निर्धारित किया जाना चाहिए।

वहीं, कुछ ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में दुकान लगाने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने स्कूल शिक्षक पर आरोप लगाया है कि परिसर में दुकान लगाने वाले कुछ लोगों से पैसे लिए जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में किसी जांच या आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इसलिए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय परिसर में बाजार लगने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अपेक्षित शांत वातावरण नहीं मिल पाता। बाजार के दौरान होने वाली बातचीत, लोगों की आवाजाही और अन्य गतिविधियों से कक्षाओं का वातावरण प्रभावित होने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय परिसर को शांत, सुरक्षित और व्यवस्थित रखना आवश्यक है। यदि गांव में साप्ताहिक बाजार के लिए स्थायी या वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाता है तो बाजार भी बेहतर तरीके से संचालित हो सकता है और स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होंगी।

ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासनिक एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल परिसर में साप्ताहिक बाजार लगाने की व्यवस्था की जांच की जाए और विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं शिक्षा को ध्यान में रखते हुए बाजार के लिए गांव में अलग स्थान निर्धारित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार गांव की आवश्यक गतिविधि है, लेकिन इसके लिए ऐसा स्थान होना चाहिए जहां आम लोगों की सुविधा के साथ-साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा भी प्रभावित न हो। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत और मांग पर संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं।
इनका कहना
“बोदल पठार स्कूल का मामला जानकारी में आने के बाद मैंने संबंधित शिक्षकों से बात की है और उन्हें स्कूल परिसर में दुकानें नहीं लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उक्त साप्ताहिक बाजार को शाला परिसर की सीमा से अलग स्थान पर लगाए जाने के लिए स्कूल प्रबंधन को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।”
आशीष चंद्र शर्मा बीआरसी, मुलताई

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