ईरान-इजरायल तनाव के बीच लागू ईंधन खरीद सीमा समाप्त, 

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मुलताई। ईरान-इजरायल के बीच तनाव के दौरान संभावित ईंधन संकट को देखते हुए शासन द्वारा डीजल एवं पेट्रोल की एकमुश्त खरीद पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध अब समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही अब सभी प्रकार के उपभोक्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी मात्रा में डीजल और पेट्रोल की खरीद कर सकेंगे। इस संबंध में स्थानीय पेट्रोल पंप संचालकों को भी आवश्यक निर्देश प्राप्त हो चुके हैं।

प्रतिबंध हटने के बाद परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय बस एवं ट्रक संचालकों का कहना है कि पहले एक बार में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा के कारण लंबी दूरी पर जाने वाले वाहनों के संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बस एवं ट्रक संचालकों ने बताया कि उनके वाहन मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों तक नियमित रूप से संचालित होते हैं।ऐसे में उस समय विभिन्न राज्यों में डीजल-पेट्रोल की संभावित कमी की खबरें सामने आने से चिंता बनी रहती थी कि यात्रा के दौरान समय पर ईंधन उपलब्ध होगा या नहीं। अब प्रतिबंध हटने के बाद वाहन स्थानीय पेट्रोल पंपों से ही फुल टैंक कर अपने गंतव्य के लिए रवाना किए जा सकेंगे, जिससे संचालन अधिक सुगम होगा।

ट्रक संचालक एवं कृषक नंदन पवार ने बताया कि मुलताई क्षेत्र में डीजल-पेट्रोल की वास्तविक कमी जैसी स्थिति कभी उत्पन्न नहीं हुई। महाराष्ट्र एवं अन्य क्षेत्रों से कमी की खबरें आने के कारण कुछ उपभोक्ताओं ने आवश्यकता से अधिक ईंधन संग्रह करना शुरू कर दिया था, जिससे कुछ समय के लिए पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ गई थी। हालांकि स्थिति शीघ्र ही सामान्य हो गई और नगर में ईंधन की उपलब्धता लगातार बनी रही।

बैतूल बाजार निवासी कृषक प्रसून चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा आदेश जारी होने के बाद शुरुआत के तीन-चार दिन तो किसानों को बड़ी दिक्कत गई, क्योंकि उन्हें ट्रैक्टर के लिए केन में डीजल पंप संचालकों द्वारा नहीं दिया जा रहा था। चुकि हमारे क्षेत्र में इंडस्ट्रीज नहीं है, इसलिए डीजल का उपयोग खेती किसानी के लिए ही किया जाता है, ना कि इंडस्ट्रीज के लिए, शासन को चाहिए था कि प्रतिबंध लगाने के स्थान पर इंडस्ट्रीज की जांच करवाती है और किसानों को आवश्यकता अनुसार डीजल उपलब्ध कराती इससे किसान होने वाली समस्या से बच सकते थे।

दिनेश ऑप्टिकल के संचालक एवं कृषक प्रकाश पवार का कहना है कि मुलताई क्षेत्र में कोई बड़ा औद्योगिक क्षेत्र नहीं होने तथा अधिकांश किसान छोटे एवं मध्यम वर्ग के होने के कारण यहां डीजल-पेट्रोल की खपत अपेक्षाकृत सीमित रहती है। इसलिए न तो प्रतिबंध लागू होने से कोई विशेष परेशानी हुई और न ही उसके हटने से बहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आवश्यकता के अनुसार ईंधन लगातार उपलब्ध रहा है।

इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप संचालक नीलेश अग्रवाल ने बताया कि उनके पेट्रोल पंप पर डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता कभी प्रभावित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण संभावित संकट की आशंका थी, तब शासन द्वारा एक बार में 200 लीटर डीजल और 50 लीटर पेट्रोल की खरीद सीमा निर्धारित करना एक दूरदर्शी निर्णय था। इससे अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी और वितरण व्यवस्था सुचारु बनी रही।

उन्होंने बताया कि अब शासन द्वारा यह प्रतिबंध समाप्त कर दिए जाने के बाद उपभोक्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार ईंधन खरीद सकेंगे। इससे परिवहन व्यवसाय को सुविधा मिलेगी, पेट्रोल पंपों की बिक्री में भी वृद्धि होगी तथा यह संकेत भी है कि वर्तमान में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है।

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