असलम अहमद
शिक्षा सत्र की शुरुआत में प्रशासनिक अनिश्चितता, 225 स्कूलों की व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है असर; विधायक ने शीघ्र नियुक्ति का दिया भरोसा
मुलताई। मुलताई विकासखंड के शिक्षा विभाग के लिए शिक्षा सत्र की शुरुआत में एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) एवं सहायक संचालक सक्षम बारमाटे का स्थानांतरण होने के बाद अब तक उनके स्थान पर नए बीईओ की नियुक्ति नहीं की गई है। इससे क्षेत्र के शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में चिंता बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि यदि शीघ्र ही नियमित अधिकारी की पदस्थापना नहीं हुई तो विकासखंड के लगभग 225 शासकीय विद्यालयों के प्रशासनिक कार्यों और शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि लंबे समय बाद मुलताई विकासखंड को प्रभारी व्यवस्था के स्थान पर पूर्णकालिक विकासखंड शिक्षा अधिकारी मिले थे। सक्षम बारमाटे के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग, शिक्षकों के साथ सतत संवाद तथा परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए किए गए नवाचारों से शासकीय विद्यालयों का प्रदर्शन बेहतर होने लगा था। ऐसे समय में उनका स्थानांतरण शिक्षा क्षेत्र के लिए झटका माना जा रहा है।

प्रभारी व्यवस्था का बढ़ सकता है बोझ,
जानकारी के अनुसार समीपस्थ प्रभात पट्टन विकासखंड में भी लंबे समय से बीईओ का पद रिक्त है। वहां का अतिरिक्त प्रभार मुलताई के बीआरसी आशीष शर्मा को सौंपा गया है। ऐसे में एक अधिकारी पहले से ही दोहरी जिम्मेदारी निभा रहा है। अब यदि मुलताई में भी नियमित बीईओ की नियुक्ति नहीं होती है तो प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।

शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार ऐसा हुआ है कि किसी अधिकारी के स्थानांतरण के बाद बीईओ का पद लंबे समय तक रिक्त रहा। कई अवसरों पर सेवानिवृत्ति के निकट पहुंचे शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार देकर व्यवस्था चलाई गई, जिससे शिक्षा संबंधी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग प्रभावित हुई। ऐसे में आशंका है कि यदि इस बार भी नियमित अधिकारी की नियुक्ति में विलंब हुआ तो शिक्षा व्यवस्था की गति धीमी पड़ सकती है।

नवाचारों से सुधरे थे परीक्षा परिणाम,
सक्षम बारमाटे ने पदभार ग्रहण करने के बाद परीक्षा परिणाम सुधारने के उद्देश्य से कई अभिनव पहल की थीं। उन्होंने विषयवार विशेषज्ञ शिक्षकों की समितियों का गठन किया, जिसमें प्रत्येक विषय के लिए तीन अनुभवी शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई। इन समितियों ने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण कर महत्वपूर्ण प्रश्नों एवं अध्ययन सामग्री का संकलन तैयार किया। यह सामग्री विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई तथा उसी आधार पर विशेष तैयारी भी कराई गई।
इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बोर्ड परीक्षाओं में देखने को मिला। शासकीय विद्यालयों का कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम, जो पूर्व में लगभग 75 प्रतिशत रहता था, इस वर्ष बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम में भी लगभग 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। शिक्षा जगत का मानना है कि यह सुधार अभी प्रारंभिक चरण में था और इसे आगे बढ़ाने के लिए नियमित नेतृत्व की आवश्यकता है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल,
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुलताई क्षेत्र में कई अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जबकि जैसे ही किसी सक्षम और कार्यकुशल अधिकारी की नियुक्ति होती है, उनका स्थानांतरण कर दिया जाता है। इससे शिक्षा व्यवस्था में निरंतरता नहीं बन पाती और सुधार की प्रक्रिया बीच में ही प्रभावित हो जाती है।

इनका कहना,
“विकासखंड शिक्षा अधिकारी के स्थानांतरण की जानकारी मिली है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुलताई में बीईओ का पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रहने दिया जाएगा। आगामी एक सप्ताह के भीतर वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र ही नियमित बीईओ की पदस्थापना कराने का प्रयास किया जाएगा।”
— चंद्रशेखर देशमुख, विधायक, मुलताई
“स्थानांतरण शिक्षा विभाग की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है। फिलहाल नए अधिकारी की पदस्थापना के आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं, लेकिन प्रयास रहेगा कि मेरे कार्यमुक्त होने से पहले ही जिला स्तर से किसी अधिकारी की नियुक्ति मुलताई विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर कर दी जाए, ताकि शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हों।”
— सक्षम बारमाटे, सहायक संचालक एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुलताई

