शब्दों का वह जादूगर अब खामोश है: बशीर बद्र की शायरी हमेशा जिंदा रहेगी,

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सिर्फ दो पंक्तियों में इंसानी दर्द, सामाजिक संवेदना और सभ्यता की पूरी कहानी कह देने वाले हिंदी-उर्दू अदब के महान शायर बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। पद्मश्री से सम्मानित बशीर बद्र का निधन केवल एक शायर का जाना नहीं है, बल्कि शब्दों की उस दुनिया का मौन हो जाना है, जिसने दशकों तक लोगों के दिलों को जोड़े रखा।

बशीर बद्र उन विरले शायरों में थे जिन्होंने उर्दू शायरी को आम आदमी की जुबान और उसके जज्बातों से जोड़ा। उनकी शायरी में न तो कठिन शब्दों का बोझ था और न ही विचारों की जटिलता, लेकिन उनकी हर पंक्ति सीधे दिल में उतर जाती थी। यही कारण है कि उनके शेर केवल मुशायरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि घर-घर, गली-मोहल्लों, राजनीतिक मंचों और सामाजिक चर्चाओं तक पहुंचे।

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