किसानों को नहीं, कंपनी को पानी ! वर्धा सिंचाई परियोजना पर फिर उठे सवाल,

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मुलताई। किसानों की सिंचाई के उद्देश्य से निर्मित वर्धा मध्य उद्वहन (लिफ्ट) सिंचाई परियोजना का पानी किसानों के बजाय एक निजी कंपनी को व्यावसायिक उपयोग के लिए दिए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। परियोजना से प्रभावित क्षेत्र के किसानों में इस मुद्दे को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि वर्षों से सिंचाई के लिए पानी की मांग करने के बावजूद उन्हें पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, जबकि निजी कंपनी को जल आवंटन कर दिया गया है। हाल ही में जिला कलेक्टर की उपस्थिति में जनपद पंचायत मुलताई में आयोजित जनसुनवाई के दौरान ग्राम गोपालतलाई के किसानों एवं जनपद सदस्य अजय बारस्कर ने ज्ञापन सौंपकर वर्धा बांध का पानी आई.जी. बेरीज प्राइवेट लिमिटेड (ब्लूबेरी कंपनी) को देने के बजाय स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराने की मांग की थी। हालांकि, किसानों का कहना है कि पूर्व की तरह इस बार भी उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

जनपद सदस्य अजय बारस्कर द्वारा जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम गोपालतलाई के किसान वर्ष 2019 से लगातार वर्धा डेम की नहर से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। किसानों ने इस संबंध में कई बार ज्ञापन दिए, धरना-प्रदर्शन किए और प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्धा बांध का निर्माण मूल रूप से किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया था। इसके बावजूद ग्राम गोपलतलाई, जो बांध से मात्र लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, वहां के किसानों को आज तक परियोजना का लाभ नहीं मिल सका है।

किसानों के अनुसार 26 जून 2024 को जल संसाधन विभाग द्वारा आई.जी. बेरीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ वर्धा बांध से प्रतिवर्ष 0.20 मिलियन घन मीटर जल आवंटन का अनुबंध किया गया। किसानों का आरोप है कि एक ओर उन्हें यह कहकर पानी देने से इंकार किया जाता रहा कि बांध में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है, वहीं दूसरी ओर निजी कंपनी को नियमित रूप से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर कंपनी के साथ हुए अनुबंध को निरस्त करने तथा किसानों को प्राथमिकता के आधार पर पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।

जानकारों के अनुसार निजी कंपनी को आवंटित जल से लगभग 60 से 70 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव है। इतना ही नहीं, इस जल से क्षेत्र के तीन या उससे अधिक गांवों के किसानों को लाभ पहुंचाया जा सकता है। यही कारण है कि स्थानीय किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग डूब क्षेत्र के किसानों को यह कहते हुए गर्मी या अन्य फसलों के लिए पानी लेने से रोकता है कि बांध केवल रबी फसल की सिंचाई के लिए डिजाइन किया गया है।

किसानों को चेतावनी दी जाती है कि यदि निर्धारित नियमों के विपरीत पानी लिया गया तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं किसानों का कहना है कि यदि बांध केवल रबी सिंचाई के लिए डिजाइन किया गया है, तो यही नियम निजी कंपनी पर क्यों लागू नहीं होता? उनका आरोप है कि कंपनी वर्षभर बांध के पानी का उपयोग कर रही है, जबकि किसानों को उनकी जरूरत के समय पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता।

मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल जल मापन व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि कंपनी को निश्चित मात्रा में पानी आवंटित किया गया है, तो उसकी निगरानी किस प्रकार की जा रही है। जब इस संबंध में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से पूछा गया कि कंपनी द्वारा लिए जा रहे पानी की मात्रा मापने के लिए क्या विभाग के पास कोई मीटर या अन्य व्यवस्था है,

तो अधिकारियों ने बताया कि विभाग द्वारा न तो किसानों के लिए और न ही कंपनी के लिए कोई मीटर लगाया गया है। इस पर किसानों ने सवाल उठाया कि यदि विभाग के पास पानी मापने की कोई व्यवस्था नहीं है, तो यह कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है कि कंपनी अनुबंध में निर्धारित मात्रा से अधिक पानी का उपयोग नहीं कर रही है।

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