विश्वप्रसिद्ध गोटमार मेला: पत्थरों की बारिश के बीच आस्था का महासंग्राम, 600 से अधिक घायल,

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पांढुर्णा। विश्वप्रसिद्ध गोटमार मेला शुक्रवार, 11 सितंबर को पूरे जोश, उत्साह और पारंपरिक आस्था के साथ आयोजित हो रहा है। मां चंडिका के प्रति श्रद्धा से जुड़े इस ऐतिहासिक मेले में पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के लोग जाम नदी के बीच गाड़े गए झंडे पर कब्जे को लेकर पारंपरिक रूप से एक-दूसरे पर पत्थर बरसा रहे हैं। दोपहर करीब 4:30 बजे तक प्राप्त जानकारी के अनुसार पथराव में 600 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है।

परंपरा के अनुसार सावरगांव पक्ष द्वारा जाम नदी के बीच गाड़े गए झंडे पर कब्जे और उसे बचाने के लिए सुबह करीब 11 बजे से गोटमार शुरू हो गया। दोपहर 3 बजे के बाद दोनों पक्षों के खिलाड़ियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई, जिसके चलते पथराव काफी तेज हो गया।मेले के दौरान कई लोगों को सिर एवं शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। समाचार लिखे जाने तक 4 से 5 लोगों के सिर फूटने की जानकारी सामने आई है, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को उपचार के लिए स्वास्थ्य शिविरों एवं अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।

मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के अनुसार मेले की सुरक्षा के लिए 700 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 3 ड्रोन कैमरों और 10 सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे आयोजन पर निगरानी रखी जा रही है।

घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य शिविर बनाए गए हैं। यहां 44 डॉक्टरों की टीम तथा 22 एंबुलेंस तैनात की गई हैं।

मामूली रूप से घायल लोगों का उपचार मौके पर बनाए गए स्वास्थ्य शिविरों में किया जा रहा है, जबकि गंभीर घायलों को तत्काल उपचार के लिए सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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