शपथ आयुक्तों द्वारा अनधिकृत शपथ पत्र बनाए जाने का आरोप,

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मुलताई। तहसील एवं न्यायालय परिसर में शपथ पत्र बनाए जाने को लेकर नोटरी अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) राजीव कहार को ज्ञापन सौंपा। नोटरी अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि शपथ आयुक्तों द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर विभिन्न प्रकार के शपथ पत्र तैयार एवं प्रमाणित किए जा रहे हैं। साथ ही, मुलताई एवं प्रभात पट्टन के लोक सेवा केंद्रों सहित अन्य कार्यालयों में भी शपथ आयुक्तों द्वारा प्रमाणित शपथ पत्र स्वीकार किए जाने की बात कही गई है।

ज्ञापन में बताया गया कि नियमानुसार शपथ आयुक्तों को केवल व्यवहार न्यायालय में उपयोग होने वाले शपथ पत्र तैयार एवं प्रमाणित करने का अधिकार है। इसके अलावा अन्य शासकीय कार्यों के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ पत्र नोटरी द्वारा सत्यापित किए जाने चाहिए। नोटरी अधिवक्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद मुलताई एवं प्रभात पट्टन के लोक सेवा केंद्रों में शपथ आयुक्तों द्वारा प्रमाणित शपथ पत्र स्वीकार किए जा रहे हैं, जो निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत है।

नोटरी अधिवक्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि शपथ आयुक्तों द्वारा प्रमाणित ऐसे शपथ पत्रों को स्वीकार करने पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही, लोक सेवा केंद्रों के लिए स्पष्ट आदेश जारी किया जाए कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार केवल नोटरी द्वारा प्रमाणित शपथ पत्र ही स्वीकार किए जाएं। नोटरी अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि शपथ आयुक्तों द्वारा व्यापक रूप से शपथ पत्र तैयार किए जाने के कारण शासन को लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है। उन्होंने इस मामले में संबंधित अधिकारियों से नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

ज्ञापन प्राप्त करने के बाद एसडीएम राजीव कहार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार एवं लोक सेवा केंद्र प्रभारी को बुलाकर आवश्यक जानकारी ली तथा मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एसडीएम द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद नोटरी अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई कि

लोक सेवा केंद्रों में शपथ पत्र स्वीकार करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान नोटरी अधिवक्ता प्रशांत भार्गव, संदीप भार्गव, सी.एस. सोनी, दिनेश पवार, मनीष नरवरे, गुणवंत निंबूलकर, अमित चौकीकर, प्रवीण माने, चेतराम वनखेड़े, टी.आर. दहारे, सुरेश मकोड़े, रमेश चिलहते, प्रमोद पवार, कैलाश पवार, कुणाल सिंह ठाकुर सहित अन्य नोटरी अधिवक्ता मौजूद रहे।

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