4 करोड़ की लागत से संवरेगा मोरखा धनगौरी बाबा मंदिर,

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मुलताई। मोरखा ग्राम के समीप स्थित प्रसिद्ध धनगौरी बाबा (नागदेव मंदिर) के भव्य जीर्णोद्धार एवं विकास कार्य को लेकर मंदिर समिति की बैठक आयोजित की गई। समिति अध्यक्ष गिरधर यादव के निवास पर हुई बैठक में मंदिर के जीर्णोद्धार, निर्माण कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। समिति के अनुसार मंदिर एवं परिसर के प्रस्तावित विकास कार्यों पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मंदिर समिति के सचिव राजू यदुवंशी ने बताया कि धनगौरी बाबा देवस्थान के विकास के लिए समिति द्वारा अब तक करीब एक करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जा चुके हैं। अब प्रस्तावित योजना के तहत मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार एवं परिसर का विकास किया जाएगा। समिति का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद धनगौरी बाबा देवधाम प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है।

मंदिर जीर्णोद्धार कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया के तहत तीन ठेकेदारों को आमंत्रित किया गया था। इनमें बारंगवाड़ी निवासी सुनील धुर्वे बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। वहीं मुलताई निवासी मनोज पवार और बघोली निवासी हेमराज सोनवाने ने बैठक में उपस्थित होकर बोली प्रक्रिया में हिस्सा लिया। बोली प्रक्रिया के दौरान हेमराज सोनवाने ने अंतिम रूप से 36 लाख रुपये की बोली प्रस्तुत की। इसके बाद मनोज पवार द्वारा 31 लाख 51 हजार रुपये की बोली लगाई गई। मंदिर समिति ने विचार-विमर्श के बाद मनोज पवार की बोली पर सहमति जताते हुए उन्हें 31 लाख 51 हजार रुपये में मंदिर जीर्णोद्धार कार्य का टेंडर स्वीकृत किया। टेंडर स्वीकृत होने के अगले ही दिन मंदिर जीर्णोद्धार कार्य का ले-आउट डाला गया और इसके साथ निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई।

मंदिर समिति के अनुसार वर्तमान प्राचीन मंदिर का निर्माण वर्ष 1913 में श्री सदोबा पटेल, सूरगांव, बैतूल निवासी द्वारा कराया गया था। करीब 113 वर्ष पुराने इस मंदिर का भवन अब जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। वास्तुकार द्वारा मंदिर का सर्वे किए जाने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से इसके जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया। समिति द्वारा मंदिर के पुराने स्वरूप और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए नए निर्माण एवं जीर्णोद्धार की योजना तैयार की गई है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित करने पर भी चर्चा की गई।

प्रस्तावित विकास योजना में मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ श्रद्धालुओं के लिए भक्त निवास, सभागृह और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने पर भी विचार किया गया है। समिति का कहना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने के कारण मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था, ठहरने और अन्य सुविधाओं का विस्तार आवश्यक हो गया है। समिति द्वारा निर्माण कार्य को निर्धारित योजना के अनुसार गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। धनगौरी बाबा मंदिर क्षेत्र का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माना जाता है। यहां प्रतिवर्ष नाग पंचमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों के अलावा अन्य स्थानों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर को लेकर क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक मान्यताएं और जनश्रुतियां प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर में विराजमान नागदेव बाबा, जिन्हें धनगौरी बाबा के नाम से भी जाना जाता है, भक्तों एवं उनके पशु-पक्षियों को अभय प्रदान करते हैं तथा उनकी संपत्ति की रक्षा और मनोकामना पूर्ण करते हैं। एक धार्मिक मान्यता के अनुसार नागदेव बाबा को पाताल के देवता के रूप में भी माना जाता है।

धनगौरी बाबा मंदिर में धार्मिक आस्था के चलते नवविवाहित जोड़ों द्वारा पूजा-अर्चना करने की परंपरा भी है। इसके अलावा नवजात बच्चों की चोटी (मुंडन/चूड़ाकरण) जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी यहां बड़ी संख्या में आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और उन्हें बेहतर एवं सुरक्षित दर्शन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंदिर समिति ने मंदिर को भव्य स्वरूप देने की योजना तैयार की है।

करीब 4 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले प्रस्तावित विकास कार्य को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। मंदिर समिति का कहना है कि जीर्णोद्धार और विकास कार्य पूरा होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी तथा धनगौरी बाबा मंदिर को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी। बैठक में मंदिर समिति अध्यक्ष गिरधर यादव, राजू यदुवंशी, होरीराम यदुवंशी, छबीराम यदुवंशी, दिनेश पाल, साधू पटेल, हेमराज यदुवंशी, राजू यदुवंशी सहित इंजीनियर मयंक उपस्थित रहे।

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