असलम अहमद मुलताई
“प्रकृति का ऋण केवल उसके संरक्षण और सहअस्तित्व से ही चुकाया जा सकता है”
मुलताई। “प्रकृति मानव जीवन का आधार है। हम प्रकृति का ऋण केवल उसके साथ प्रेमपूर्वक विचरण और संरक्षण करके ही उतार सकते हैं। मानव जीवन के अस्तित्व और विकास में पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और समस्त जीव-जंतुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। परस्पर प्रेम, सहयोग और संरक्षण की भावना से ही खुशहाल और संतुलित जीवन संभव है।” यह प्रेरणादायक विचार हैं न्यू कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल की प्राचार्य विनीता अनीश नायर के है, जो पिछले 15 वर्षों से प्रकृति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता की जीवंत मिसाल बनी हुई हैं।

शिक्षा के साथ प्रकृति संरक्षण को बनाया जीवन का उद्देश्य,
एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था की प्राचार्य होने के बावजूद विनीता नायर ने अपने व्यस्त जीवन में पर्यावरण संरक्षण को विशेष स्थान दिया है। उन्होंने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया, बल्कि समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया है। नगर के मसोद रोड स्थित न्यू कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल और समीप स्थित दक्षिणेश्वर बालाजी मंदिर परिसर को उन्होंने हरियाली और जैविक जीवनशैली का सुंदर केंद्र बना दिया है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही मन को अद्भुत शांति और सुकून का अनुभव होता है। चारों ओर फैली हरियाली, फलों से लदे वृक्ष और औषधीय पौधों की सुगंध वातावरण को रमणीय बना देती है।

औषधीय पौधों और जैविक खेती से सजाया हरियाली का संसार,
विनीता नायर ने सीमित स्थान में प्रकृति के प्रति अपने समर्पण और दूरदृष्टि का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। यहां आम, नारियल, चीकू सहित अनेक फलदार वृक्षों के साथ औषधीय पौधों की सुसज्जित क्यारियां आकर्षण का केंद्र हैं। सर्पगंधा, अश्वगंधा, हींग, तेजपत्ता, दालचीनी, रुद्राक्ष और काली हल्दी जैसे दुर्लभ एवं उपयोगी पौधों की सुवास पूरे परिसर को प्राकृतिक ऊर्जा से भर देती है। इसके साथ ही यहां विभिन्न प्रकार के जैविक अनाज और सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है, जो प्राकृतिक खेती के महत्व को दर्शाता है।

नाम पुकारते ही दौड़ आती हैं लक्ष्मी, कपिला और नंदिनी,
आज के दौर में जहां देसी गायों का पालन लगातार कम होता जा रहा है और वे सड़कों पर आवारा पशुओं के रूप में नजर आती हैं, वहीं विनीता नायर ने छह देसी गायों को अपने परिवार का हिस्सा बनाकर गौसंरक्षण की प्रेरक मिसाल पेश की है। वे बताती हैं कि लोग अक्सर पशुओं को केवल लाभ-हानि की दृष्टि से देखते हैं, जबकि पशुओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी उतना ही आवश्यक है। उनके यहां लक्ष्मी, कपिला, शंभू, नंदिनी, पार्वती सहित सभी गायें परिवार के सदस्य की तरह रहती हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जैसे ही उनका नाम लेकर पुकारा जाता है, वे स्नेहपूर्वक दौड़ी चली आती हैं।

गोबर से बायोगैस और जैविक खाद का निर्माण,
विनीता नायर केवल गौपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गौसंरक्षण को आत्मनिर्भर और पर्यावरण हितैषी मॉडल के रूप में भी विकसित कर रही हैं। गायों के गोबर से बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जाती है, जिसका उपयोग जैविक सब्जियों और फसलों के उत्पादन में किया जाता है। उनकी यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी प्रदान करती है।

समाज के लिए बन रही हैं प्रेरणा,
विनीता अनीश नायर का यह प्रयास साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो सीमित संसाधनों में भी प्रकृति, पशु-पक्षियों और पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उनका जीवन समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो लोगों को प्रकृति से जुड़ने और उसे संवारने का संदेश देता है।

