जगद्गुरु शंकराचार्य से ताप्ती भक्तों ने की भेंट, उद्गम-तीर्थ के धार्मिक, पौराणिक एवं पर्यावरणीय संरक्षण पर हुआ मंथन,
मुलताई। आदि गंगा एवं पुण्य सलिला सूर्यपुत्री माँ ताप्ती की पावन उद्गमस्थली मुलताई में प्रस्तावित विकास कार्यों तथा माँ ताप्ती से जुड़े धार्मिक, आध्यात्मिक, पौराणिक एवं पर्यावरणीय विषयों को लेकर ताप्ती भक्तों के प्रतिनिधिमंडल ने पूज्य पश्चिमाम्नाय श्री द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट की। इस दौरान उद्गम-तीर्थ के संरक्षण, समग्र विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा कर मार्गदर्शन प्राप्त किया गया।
भेंट के दौरान माँ ताप्ती की पौराणिक महिमा, धार्मिक गरिमा एवं आध्यात्मिक महत्व के साथ उद्गम-तीर्थ की प्राचीनता, प्राकृतिक स्वरूप, जलधारा तथा पर्यावरणीय संतुलन के संरक्षण जैसे विषयों पर शास्त्रसम्मत विमर्श हुआ। साथ ही देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी विचार-विमर्श किया गया।

पंचकोसी परिक्रमा पदमार्ग विकसित करने की संकल्पना,
विमर्श के दौरान विशेष रूप से माँ ताप्ती पंचकोसी परिक्रमा पदमार्ग विकसित करने की संकल्पना को लेकर चर्चा हुई। ताप्ती उद्गम क्षेत्र की सनातन तीर्थ-परंपरा, धार्मिक महत्ता, प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए पंचकोसी परिक्रमा मार्ग विकसित किए जाने की आवश्यकता पर विचार किया गया। ताप्ती भक्तों ने जगद्गुरु शंकराचार्य जी के समक्ष विषय रखते हुए कहा कि पंचकोसी परिक्रमा पदमार्ग विकसित होने से ऐसे श्रद्धालु, जो लंबी एवं विस्तृत तीर्थयात्रा करने में सक्षम नहीं हैं, वे भी सहज रूप से माँ ताप्ती की परिक्रमा एवं तीर्थ-साधना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही यह मार्ग उद्गमस्थली की पौराणिक महिमा, धार्मिक अस्मिता और प्राकृतिक स्वरूप के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

तीर्थ-पथ के साथ जल एवं पर्यावरण संरक्षण पर जोर,
पंचकोसी परिक्रमा पदमार्ग को केवल आवागमन का मार्ग न मानकर तीर्थ-परंपरा, जल-संरक्षण, पर्यावरण-संवर्धन और सनातन सांस्कृतिक चेतना को जोड़ने वाले आध्यात्मिक तीर्थ-पथ के रूप में विकसित किए जाने की संकल्पना पर भी मंथन हुआ। इससे उद्गम क्षेत्र से जुड़े प्राचीन देवस्थलों, पावन कुंडों एवं अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों को एक समग्र तीर्थ-पथ से जोड़ा जा सकेगा। साथ ही इन धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में भी योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जाने की संभावनाएं बनेंगी।
पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने माँ ताप्ती की पावन उद्गमस्थली के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। उनका मार्गदर्शन माँ ताप्ती की सेवा और उद्गम-तीर्थ के संरक्षण के लिए कार्यरत ताप्ती भक्तों के लिए प्रेरणादायी रहा। इस अवसर पर माँ ताप्ती प्राधिकरण समिति के सदस्य गोलू उघड़े, दिनेश कलभोर, मनीष माथनकर कर्ण देशमुख सहित अन्य ताप्ती भक्त उपस्थित रहे।

