हिंदी और गुजराती भाषा में तैयार भक्तिमय गरबा गीत माँ ताप्ती को समर्पित, स्थानीय संस्कृति और आस्था का संगीत से हुआ संगम
मुलताई, सूर्यपुत्री माँ ताप्ती की पावन जन्मस्थली मुलताई की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को संगीत के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने की पहल के तहत माँ ताप्ती के पहले गरबा गीत का लोकार्पण किया गया। गीत का विमोचन अंतरराष्ट्रीय सरोद वादक, संगीतकार एवं गीतकार पुष्कर देशमुख के करकमलों से हुआ।
यह भक्तिमय गरबा गीत माँ ताप्ती के चरणों में सादर समर्पित किया गया है। माँ ताप्ती और मुलताई को केंद्र में रखकर तैयार किए गए इस गीत में माँ ताप्ती को सूर्यपुत्री, जीवनदायिनी एवं लोक-आस्था की देवी के रूप में नमन किया गया है। गीत में स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और माँ ताप्ती की महिमा का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है। साथ ही माँ ताप्ती के व्यापक धार्मिक महत्व को गरबा की लोक-सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

हिंदी और गुजराती में तैयार किया गया गरबा गीत,
गीतकार कुलदीप राठौर ने बताया कि गरबा की मूल सांस्कृतिक विरासत और उसकी स्तुति परंपरा को ध्यान में रखते हुए गीत को हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि माँ ताप्ती के दिव्य स्वरूप और महिमा को गरबा की भक्तिमय शैली के माध्यम से विनम्रतापूर्वक माँ के चरणों में अर्पित किया गया है।

उन्होंने बताया कि गीत की रचना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता ली गई है। पारंपरिक धार्मिक भावना, स्थानीय आस्था और आधुनिक तकनीक के समन्वय से तैयार इस गीत को माँ ताप्ती की भक्ति को नए संगीत माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। गीत के विमोचन अवसर पर ताप्ती मंदिर के सौरभ जोशी, समाजसेवी नरेंद्र गिरी, गुड्डू पवार, नीलू नागले, सुमित पंजाबी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

