संजय द्विवेदी बैतूल ,असलम अहमद मुलताई
करीब 20 हजार करोड़ की अंतरराज्यीय परियोजना से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई का लाभ, ताप्ती उद्गमस्थली को शामिल करने की उठी मांग,
मुलताई। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच ताप्ती नदी के जल का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से प्रस्तावित ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना को देश की महत्वाकांक्षी जल परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। करीब बीस हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना से दोनों राज्यों के कई क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, जल उपलब्धता बढ़ाने और भूजल स्तर में सुधार लाने की योजना है। हालांकि, परियोजना के अब तक सामने आए विवरणों में बैतूल जिले और ताप्ती नदी की उद्गमस्थली मुलताई को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। सूर्यपुत्री मां ताप्ती का उद्गम मुलताई से होता है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों और किसानों की मांग है कि ताप्ती नदी पर बनने वाली इतनी बड़ी परियोजना का लाभ उसके उद्गम स्थल और बैतूल जिले को भी मिलना चाहिए। उनका कहना है कि परियोजना की योजना बनाते समय स्थानीय किसानों, ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों के हितों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि जिले में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढऩे के साथ ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र में भी जल संकट कम हो सके।
करीब 20 हजार करोड़ रुपये की परियोजना, दोनों राज्यों को मिलेगा लाभ,
ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना की अनुमानित लागत विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्टों में करीब 19,244 करोड़ से 20 हजार करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। परियोजना का उद्देश्य ताप्ती नदी के जल का बेहतर प्रबंधन कर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के निर्धारित क्षेत्रों में सिंचाई सहित अन्य जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराना है। परियोजना के प्रारंभिक विवरणों के अनुसार, दोनों राज्यों के लिए कुल लगभग 31.13 टीएमसी जल उपयोग का उल्लेख मिलता है। इसमें महाराष्ट्र के लिए करीब 19.36 टीएमसी और मध्यप्रदेश के लिए लगभग 11.76 टीएमसी जल आवंटन प्रस्तावित बताया गया है। प्रकाशित आंकड़ों में दोनों राज्यों के करीब 3.58 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी सामने आया है। इस परियोजना से संबंधित प्रस्तावों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाना, किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा देना और जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करना है।

खारिया-गुटीघाट क्षेत्र में प्रस्तावित है मुख्य जल संरचना,
परियोजना की प्रमुख प्रस्तावित जल संरचना ताप्ती नदी पर खारिया-गुटीघाट क्षेत्र में बनाई जानी है। यह क्षेत्र मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की खालवा तहसील और महाराष्ट्र की सीमा के आसपास स्थित बताया गया है। यहां नदी पर लो-डायवर्जन वियर यानी पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने वाली संरचना प्रस्तावित है। इसकी जल संग्रहण क्षमता लगभग 8.31 टीएमसी बताई गई है। प्रस्तावित संरचना के माध्यम से पानी का नियोजित नियंत्रण और वितरण किया जाना है। इसके साथ ही दाएं और बाएं तट पर नहरें बनाने की योजना भी बताई गई है, जिनके जरिए निर्धारित कृषि क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जाएगा। परियोजना के कुछ हिस्सों में लंबी दूरी तक पानी ले जाने और सुरंगों के माध्यम से जल परिवहन की व्यवस्था का भी उल्लेख मिलता है।

किन जिलों को मिल सकता है सिंचाई का लाभ?
परियोजना से संबंधित प्रकाशित विवरणों में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर और खंडवा जिले तथा महाराष्ट्र के अमरावती, अकोला, बुलढाणा और जलगांव क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में लगभग 1.23 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में करीब 2.30 से 2.35 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ देने की योजना है। इस तरह दोनों राज्यों में कुल लगभग 3.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य बताया गया है। परियोजना से कृषि उत्पादन बढ़ाने, फसलों को समय पर पानी उपलब्ध कराने और कुछ क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। लेकिन बैतूल जिले और मुलताई को इस योजना में किस तरह शामिल किया जाएगा, इस संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर परियोजना के लाभों में बैतूल जिले की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।

ताप्ती की उद्गमस्थली मुलताई को भी मिले प्रत्यक्ष लाभ : सुखदेव पांसे,
पूर्व मंत्री एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे ने मांग की है कि ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना में बैतूल जिले और मुलताई को भी शामिल किया जाए। उनका कहना है कि मुलताई मां ताप्ती की उद्गमस्थली होने के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखती है। ऐसे में ताप्ती नदी पर बनने वाली बड़ी परियोजना में उद्गम स्थल और आसपास के क्षेत्र के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। पांसे के अनुसार, परियोजना की योजना बनाते समय प्राकृतिक संसाधनों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि बैतूल जिले को परियोजना का लाभ देने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को सिंचाई एवं पेयजल की पर्याप्त सुविधा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के कारण आदिवासी परिवारों को विस्थापन का सामना न करना पड़े और जल, जंगल, जमीन से जुड़े उनके अधिकार सुरक्षित रहें। स्थानीय आदिवासी समुदायों को विश्वास में लेकर उनकी सहमति और हितों का सम्मान किया जाना चाहिए।

जल, जंगल, जमीन और आदिवासियों के हितों की रक्षा हो : रामू टेकाम
मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम ने भी परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की भागीदारी और पारदर्शिता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना को अंतरराज्यीय स्तर पर बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना बताया जा रहा है, लेकिन इसके संबंध में आम लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाने से भ्रम की स्थिति बन रही है। टेकाम का कहना है कि यदि ताप्ती नदी पर इतनी बड़ी परियोजना बनाई जा रही है, तो सबसे पहले जल, जंगल, जमीन और आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। शासन को स्थानीय आदिवासी समुदायों को विश्वास में लेकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना से बैतूल जिले और ताप्ती की उद्गमस्थली मुलताई को क्या लाभ मिलेगा।

बैतूल जिले के हितों का रखा जाएगा पूरा ध्यान: हेमंत खंडेलवाल,
ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना में बैतूल जिले को मिलने वाले लाभ और जिले की भागीदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि इस परियोजना को लेकर पहले जो बातें सामने आई थीं, वे पुरानी हैं। वर्तमान में योजना के संबंध में सर्वे का कार्य चल रहा है और इसमें बैतूल जिले के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। ताप्ती पर चिल्लोर-ढेंगना सिंचाई परियोजना बनाई जा रही है। योजना के तकनीकी पहलुओं और अन्य विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली जा सकती है।

ताप्ती के जल का लाभ जिले को मिले, इसके लिए बनाई जा रही है योजना : वामनकर,
बैतूल जिले एवं मुलताई ताप्ती उद्गम को तकनीकी रूप से ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना से जोड़ा जाना संभव नहीं है, किंतु बैतूल जिले के लिए ताप्ती नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी सिंचाई योजना चिल्लोर-ढेंगना वृहद सिंचाई परियोजना बनाई जा रही है। जिसकी अनुमानित लागत करीब 4,039 करोड़ रुपये और सिंचाई का लक्ष्य लगभग 62 हजार हेक्टेयर बताया जा रहा है।
– विपिन वामनकर, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (एस.ई.) जल संसाधन विभाग बैतूल

