ताप्ती का ओवरफ्लो होना माना जाता है अच्छी वर्षा का संकेत,ताप्ती कुंड की सीमाएं लांघकर प्राचीन ताप्ती मंदिर के सामने सूर्य कुंड में पहुंची जलधारा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे ताप्ती तट
मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई में मां ताप्ती का ओवरफ्लो होना केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि नगरवासियों के लिए उत्सव और आस्था का अवसर भी माना जाता है। ताप्ती सरोवर के तटबंधों को पार कर जब मां ताप्ती की पावन जलधारा बह निकली तो नगरवासियों के उत्साह का ठिकाना नहीं रहा। जैसे ही ताप्ती के ओवरफ्लो होने की जानकारी लोगों को मिली, बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और श्रद्धालु ताप्ती तट पर पहुंचने लगे। इस दौरान लोग ताप्ती की बहती जलधारा का आनंद लेते और मां ताप्ती का पूजन-अर्चन करते नजर आए।
ताप्ती जलधारा जब ताप्ती कुंड (सरोवर) की सीमाओं को लांघते हुए दोनों शिव मंदिरों के मध्य बनी सीढ़ियों से होकर प्राचीन ताप्ती मंदिर के समक्ष स्थित सूर्य कुंड में प्रवेश करती है, तो यह दृश्य अपने आप में आकर्षण का केंद्र बन जाता है। ताप्ती के ओवरफ्लो होने की इस प्राकृतिक घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग ताप्ती तट पहुंचते हैं।

अच्छी वर्षा का माना जाता है संकेत,
स्थानीय मान्यता के अनुसार ताप्ती सरोवर का ओवरफ्लो होना क्षेत्र में अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है। ताप्ती सरोवर और शनि सरोवर सहित क्षेत्र के कई जलस्रोतों का जलस्तर वर्षा पर निर्भर रहता है। ऐसे में ताप्ती सरोवर के छलकने से क्षेत्र में पर्याप्त बारिश और जलस्रोतों के भरने की उम्मीद बढ़ जाती है। यही कारण है कि ताप्ती का ओवरफ्लो होना अब मुलताई में एक तरह के पर्व का रूप लेता जा रहा है। जलधारा के बहने के साथ ही ताप्ती तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है। श्रद्धालु पवित्र जल में स्नान कर मां ताप्ती का पूजन-पाठ करते हैं। वहीं उत्साही युवा गाजे-बाजे के साथ ताप्ती तट पहुंचकर खुशियां मनाते हैं। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से श्रद्धालुओं के लिए मिष्ठान वितरण भी किया जाता है।

तीन राज्यों की जीवनरेखा है मां ताप्ती,
मां ताप्ती का मुलताई से विशेष धार्मिक और प्राकृतिक संबंध है। मुलताई स्थित ताप्ती कुंड से निकलने वाली ताप्ती नदी पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहने वाली भारत की प्रमुख नदियों में शामिल है। ताप्ती नदी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर बहती है और इन तीनों राज्यों के अनेक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत एवं जीवनरेखा मानी जाती है। मुलताई के ताप्ती कुंड से निकलकर ताप्ती नदी सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखलाओं और घाटियों से गुजरते हुए मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को पार करती है।

इसके बाद नदी महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र से होकर गुजरात में प्रवेश करती है। गुजरात के सूरत सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए ताप्ती अंततः खंभात की खाड़ी में जाकर अरब सागर में विलीन हो जाती है। लगभग 724 किलोमीटर की यात्रा में मां ताप्ती अनेक नगरों, गांवों और कृषि क्षेत्रों को अपने जल से समृद्ध करती हुई तीन राज्यों के जनजीवन, कृषि और संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि ताप्ती का उद्गम स्थल मुलताई धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। ताप्ती सरोवर का छलकना यहां के लोगों के लिए अच्छी बारिश, खुशहाली और जलसमृद्धि की उम्मीद लेकर आता है।


