12 साल में 30 करोड़ खर्च, फिर भी दो दिन में एक बार पानी; अब 7.30 करोड़ का नया दांव,

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जितना एक दशक पहले मिलता था। 12 वर्ष पूर्व भी लोगों को दो दिन के अंतराल में पेयजल उपलब्ध कराया जाता था और वर्तमान में भी स्थिति लगभग वैसी ही बनी हुई है। हालांकि नगर पालिका एक बार फिर नई उम्मीदों के साथ अमृत 2.0 योजना के तहत हरदौली जल आवर्धन योजना के पीएचई घटक के पूरक कार्यों को गति दे रही है। इसके अंतर्गत लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से घर-घर तक पाइपलाइन पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है, जिसका करीब 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है। इसके अलावा हरदौली जल परियोजना को नगरीय विद्युत फीडर से जोड़ने के लिए नगरीय निकाय निधि से लगभग 17 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन कार्यों की निगरानी कर रहे नगर पालिका के उपयंत्री योगेश अनेराव का कहना है कि इन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद पेयजल वितरण प्रणाली में सुधार होगा। हालांकि नगरवासियों को प्रतिदिन पानी मिलेगा या नहीं, इसे लेकर अभी स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में वर्षों से अधूरी उम्मीदों का सामना कर रही जनता के लिए विश्वास करना आसान नहीं है।

नगरवासियों का कहना है कि हर बार नई योजना स्वीकृत होने और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद यह दावा किया जाता है कि अब पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने और बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े होने के बावजूद पेयजल आपूर्ति की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया है। आज भी अधिकांश क्षेत्रों में दो दिन के अंतराल से ही पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में नागरिक यह सवाल उठाने लगे हैं कि यदि पेयजल समस्या के समाधान पर 30 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, तो आखिर इसका प्रत्यक्ष लाभ जनता को क्या मिला?

लगभग 13 वर्ष पूर्व क्षेत्रीय विधायक सुखदेव पांसे के प्रयासों से 22 करोड़ रुपये की लागत वाली हरदौली जल आवर्धन योजना स्वीकृत हुई थी। योजना के तहत लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से हरदौली बांध का निर्माण तथा 12 करोड़ रुपये की लागत से पाइपलाइन, पानी की टंकियां और अन्य पेयजल अधोसंरचना विकसित की जानी थी। बाद में किसानों को मुआवजा भुगतान सहित अन्य कार्यों के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 5 करोड़ रुपये अतिरिक्त स्वीकृत किए गए, जिससे योजना की कुल लागत बढ़कर करीब 27 करोड़ रुपये हो गई। उस समय दावा किया गया था कि योजना के पूर्ण होने के बाद नगरवासियों को प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध होगा तथा यह परियोजना आगामी 50 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

हरदौली योजना के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी के कारण नगर पालिका ने अंतरिम राहत के रूप में सांडिया पेयजल योजना पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए। इसके तहत बोरवेल, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन विस्तार तथा विद्युत कनेक्शन को नगरीय फीडर से जोड़ने जैसे कार्य किए गए। बताया जाता है कि इस अंतरिम व्यवस्था पर भी 2 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की गई थी। उस समय दावा किया गया था कि सांडिया योजना से नगर की पेयजल समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन समय बीतने के साथ यह योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी और नगर पालिका का पूरा ध्यान पुनः हरदौली परियोजना पर केंद्रित हो गया क्योंकि साडिया में भुगतान हो चुका था और हरदौली में भुगतान बाकी था।

हरदौली बांध का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। जानकारी के अनुसार बांध में लगभग 4.7 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) जल संग्रहण क्षमता उपलब्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मात्रा इतनी है कि नगर में प्रतिदिन दो बार जलापूर्ति किए जाने के बाद भी बड़ी मात्रा में पानी शेष रह सकता है। इसके बावजूद बांध निर्माण पूर्ण हुए लगभग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी नगरवासियों को इसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाया है।

यही कारण है कि परियोजना की उपयोगिता और इसके क्रियान्वयन की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नगरवासियों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी पेयजल आपूर्ति की स्थिति में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आया है, तो योजनाओं की प्रभावशीलता और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा होना आवश्यक है। लोगों का मानना है कि केवल नई योजनाओं की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि खर्च की गई राशि का लाभ वास्तव में आम नागरिकों तक पहुंचे।

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