अमरदीप की मौत के बाद अनमोल अस्पताल के विरुद्ध सड़कों पर फुटा गुस्सा,

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मुलताई। नगर के निजी अस्पताल अनमोल हॉस्पिटल में उपचार के बाद युवा व्यवसायी अमरदीप सिंह (सन्नी) की मृत्यु के मामले को लेकर नगर में आक्रोश व्याप्त है। बुधवार को बड़ी संख्या में युवाओं ने साईं सेवा समिति एवं हनुमान सेवा समिति के बैनर तले विरोध रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अस्पताल संचालक डॉ. प्रवीण शुक्ला पर चिकित्सा सेवाओं में कथित लापरवाही बरतने तथा स्वास्थ्य संबंधी मानकों की अनदेखी करने के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मुलताई स्थित अनमोल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नगरवासियों एवं मरीजों के परिजनों के बीच लंबे समय से असंतोष एवं गंभीर शिकायतें सामने आती रही हैं। ज्ञापनकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल में उपचार संबंधी लापरवाही, चिकित्सा मानकों की अनदेखी तथा विभिन्न नियमों के उल्लंघन के संबंध में समय-समय पर शिकायतें की जाती रही हैं, लेकिन अब तक प्रभावी जांच और कार्रवाई नहीं होने से आमजन में रोष बढ़ा है।

ज्ञापन में हाल ही में अस्पताल में उपचाररत रहे युवा अमरदीप सिंह (सन्नी) की मृत्यु का उल्लेख करते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही लगभग एक वर्ष पूर्व नगर के युवक मोहित पाल की मृत्यु के मामले में भी उपचार संबंधी गंभीर प्रश्न उठाए गए थे। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि इन घटनाओं सहित अन्य मामलों में भी अस्पताल के विरुद्ध उपचार संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं,

जिन्हें गंभीरता से जांचा जाना आवश्यक है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में मरीजों की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का समुचित परीक्षण किए बिना उपचार किया जाता है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कई बार उपचार के बाद मरीजों की स्थिति में सुधार होने के बजाय और अधिक गंभीरता आ जाती है।

ज्ञापन में अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में योग्य एवं प्रमाणित लैब टेक्नीशियन की उपलब्धता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया एवं विशेषज्ञ पर्यवेक्षण के अभाव में जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिससे मरीजों के उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

ज्ञापनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मरीजों को दी जाने वाली दवाओं एवं उपचार संबंधी दस्तावेजों में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं मानकों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि अनेक मरीजों को दिए गए प्रिस्क्रिप्शन पर चिकित्सक के स्पष्ट हस्ताक्षर, पंजीयन क्रमांक अथवा अन्य आवश्यक विवरण अंकित नहीं पाए गए, जो चिकित्सा आचार संहिता के विपरीत है।

अस्पताल परिसर अथवा उससे संबंधित मेडिकल स्टोर से निम्न गुणवत्ता की दवाएं उपलब्ध कराए जाने के आरोप भी ज्ञापन में लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने इसकी भी जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं है तथा कई संवेदनशील चिकित्सकीय कार्य अप्रशिक्षित कर्मचारियों से कराए जाते हैं,

जिससे मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ज्ञापनकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि मरीजों के जीवन एवं स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष वर्षा गडेकर, चिंटू खन्ना, सुमित शिवहरे, निखिल जैन, आकाश राजपूत, राहुल वराठे, कुलदीप भावसार, लकी मस्तकार, दीपक सोलंकी, हेमंत मस्की, जय सूर्यवंशी, नितेश रावत, नितेश शर्मा, सहित बड़ी संख्या में युवा एवं नागरिक उपस्थित रहे।

मेरे द्वारा किसी प्रकार की गलती नहीं की गई, मेरे यहां जो मरीज का इलाज किया उनका बीपी लो था इलाज करके घर भेज दिया गया मैं ठीक करके भेज दिया था उसके बाद कुछ हुआ तो मैं जिम्मेदार कैसे हूं भई मैं कोई एमडी मेडिसिन नहीं हूं मैं एक नॉर्मल फिजिशियन हूं आप कैसे उम्मीद कर सकते कि मैं हार्ट का भी इलाज करूंगा।
डॉक्टर प्रवीण शुक्ला संचालक अनमोल हॉस्पिटल मुलताई

अनमोल अस्पताल को लेकर सामने आया यह मामला पहला नहीं बताया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में भी अस्पताल की कार्यप्रणाली और उपचार संबंधी शिकायतों के कई मामले चर्चा में रहे हैं। हालांकि, शिकायतों के बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई, जिससे कई पीड़ित परिवारों में असंतोष बना हुआ है। यदि किसी व्यक्ति को भी उक्त अस्पताल में उपचार, व्यवस्थाओं अथवा अन्य किसी विषय को लेकर शिकायत या परेशानी का सामना करना पड़ा है, तो वह अपनी बात हम तक पहुंचा सकता है। हमारा प्रयास रहेगा कि प्रत्येक पीड़ित की समस्या को पूरी निष्पक्षता, तथ्यों और शालीनता के साथ सार्वजनिक मंच तक पहुंचाया जाए, ताकि संबंधित पक्षों और प्रशासन का ध्यान उन मुद्दों की ओर आकर्षित हो सके जो जनहित से जुड़े हैं।

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