त्याग और बलिदान के पर्व ईद-उल-अज़हा पर गूंजी अमन-चैन की दुआएं,

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मुलताई। त्याग, बलिदान और भाईचारे का प्रतीक पर्व ईद-उल-अज़हा (ईद-ए-कुर्बां) पवित्र नगरी मुलताई में शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुस्लिम समाज के लोगों ने ईदगाह, नूरानी मस्जिद, मरकज मस्जिद तथा जामा मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों में ईद-उल-अज़हा की नमाज अदा कर देश और दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली एवं भाईचारे की दुआ मांगी। नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद दी। ईदगाह में हाफिज इस्माइल साहब ने नमाज अदा कराई तथा लोगों को माता-पिता, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के हुकूक अदा करने की सीख देते हुए समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की दुआ कराई।

हाफिज इस्माइल साहब ने नमाज के बाद मुस्लिम समाज से कुर्बानी के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुर्बानी अल्लाह को प्रिय है, लेकिन इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति को असुविधा या परेशानी न हो।

उन्होंने लोगों से अपील की कि कुर्बानी के बाद निकलने वाले अवशेष नगरपालिका के कचरा वाहनों में ही डालें तथा इस बात का विशेष ध्यान रखें कि खून नालियों में न बहे। नमाज अदा करने के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग कब्रिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पूर्वजों की मगफिरत एवं शांति के लिए दुआएं कीं।

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