वर्षों से अधर में अटका स्लुस गेट निर्माण, बारिश से पहले फिर बढ़ी ताप्ती सरोवर की चिंता,

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17 लाख के टेंडर और अनुबंध के बावजूद शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य, जनप्रतिनिधियों ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की उठाई मांग

मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई में हर वर्ष मानसून से पहले जिस समस्या को लेकर नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की चिंता बढ़ जाती है, वह है ताप्ती सरोवर के जल निकासी द्वार “स्लुस गेट” का निर्माण। बीते लगभग दो दशकों से यह प्रश्न लगातार बना हुआ है कि आखिर कब ताप्ती सरोवर और छोटे तालाब को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण स्लुस गेट का स्थायी और सुरक्षित निर्माण हो सकेगा। इस वर्ष भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

नगर पालिका द्वारा लगभग 17 लाख रुपये की लागत से स्लुस गेट निर्माण के लिए टेंडर जारी कर ठेकेदार से अनुबंध भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर पुराना जल निकासी द्वार लगातार जर्जर होता जा रहा है, जिससे आगामी वर्षाकाल में गंभीर स्थिति बनने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

बीती रात नगर पालिका के उपयंत्री महेश शर्मा के साथ नगर पालिका के एल्डरमैन निलेश चावरिया, राजू चौबे, प्रीतम सिसोदिया, गजनी साहू, बिसन पंजाबी, शाहू ढोमने और बबलू खातरकर स्लुस गेट स्थल पर पहुंचे तथा मौके की स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताते हुए कहा कि स्लुस गेट की हालत लगातार खराब होती जा रही है। यदि इस वर्ष भी निर्माण कार्य समय पर नहीं हुआ, तो बारिश के दौरान इसके गंभीर और भयावह परिणाम सामने आ सकते हैं।

जनप्रतिनिधियों ने मांग करते हुए कहा कि ठेकेदार को कई अवसर दिए जाने के बावजूद कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार को तत्काल ब्लैकलिस्ट कर उसकी सिक्योरिटी राशि जब्त की जाए तथा कार्य किसी अन्य सक्षम ठेकेदार को सौंपा जाए, ताकि बारिश से पहले निर्माण पूरा हो सके।

ताप्ती सरोवर और छोटे तालाब को जोड़ने वाला स्लुस गेट आकार में भले छोटा हो, लेकिन तकनीकी रूप से यह अत्यंत महत्वपूर्ण संरचना मानी जाती है। नगर पालिका ने  सी एल मरकाम कार्यपालन यंत्री सिंचाई विभाग तथा सेवानिवृत्त उपयंत्री सीबी पाटेकर सहित अन्य विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लेकर इसका एस्टीमेट और डिजाइन तैयार किया गया है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान गेट की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। इसके समाधान के लिए पूरे स्लुस गेट क्षेत्र को खोदकर नई फाउंडेशन तैयार करनी होगी। निर्माण में दो पाइप डालकर वेल सिस्टम के माध्यम से नया गेट स्थापित किया जाएगा। सिंचाई विभाग के तकनीकी अधिकारियों का कहना है कि यदि सक्षम और तकनीकी रूप से दक्ष ठेकेदार कार्य करे तो यह निर्माण लगभग 20 दिनों में भी पूरा किया जा सकता है।

स्लुस गेट निर्माण में हो रही देरी को लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन अधिकांश योजनाओं के अपेक्षित परिणाम जमीन पर दिखाई नहीं देते।   बुद्धिजीवियों का मानना है कि जनता को भी अपने टैक्स और विकास कार्यों में खर्च होने वाली राशि को लेकर अधिक जागरूक होना होगा, तभी योजनाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी।
इनका कहना
“स्लुस गेट ठेके की सभी प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी हैं। ठेकेदार से अनुबंध किया जा चुका है तथा उसे कई बार नोटिस भी जारी किए गए हैं। यदि वह शीघ्र कार्य प्रारंभ नहीं करता है, तो ठेका निरस्त कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
— महेश शर्मा,
उपयंत्री, नगर पालिका मुलताई

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