पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कलेक्टर से लगाई गुहार—राहत राशि, नौकरी और पुनर्वास की मांग
मुलताई। पवित्र नगरी में हुई आगजनी और दंगों की एक दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया। माता-पिता की मौत के बाद अब दो मूक-बधिर बेटे—नीतीश बचले और शुभम बचले—पूरी तरह से निराश्रित और असहाय हो गए हैं। इस हृदयविदारक घटना को लेकर पूर्व विधायक एवं किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने जिला कलेक्टर बैतूल को पत्र लिखकर तत्काल सहायता और पुनर्वास की मांग की है।

दंगों से शुरू हुई त्रासदी, मौत तक पहुंची कहानी पत्र के अनुसार, 9-10 अक्टूबर 2025 को मुलतापी में दंगाइयों द्वारा नामदेव बचले के दो ठेलों सहित 11 अन्य ठेलों और दुकानों में आगजनी और लूटपाट की गई थी। इस घटना में नामदेव बचले को करीब 65 हजार रुपए का नुकसान हुआ।
इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा— 19 जनवरी 2026 को पत्नी सरिता बचले का निधन हो गया और गहरे सदमे में 18 अप्रैल 2026 को नामदेव बचले ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली अब इस चार सदस्यीय परिवार में केवल दो बेटे ही बचे हैं, जो मूक-बधिर हैं और पूरी तरह असहाय स्थिति में जीवन जीने को मजबूर हैं। मूक-बधिर बेटों की हालत बेहद दयनीय नीतीश और शुभम बचले न सिर्फ अपने माता-पिता को खो चुके हैं, बल्कि जीविकोपार्जन का कोई साधन भी उनके पास नहीं है। नीतीश बचले ने ब्रेल लिपि के माध्यम से बीए तक शिक्षा प्राप्त की है, इसके बावजूद रोजगार के अवसर न होने से उनका भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।

अब तक दर्ज नहीं हुई FIR, प्रशासन पर उठे सवाल सबसे गंभीर पहलू यह है कि इतनी बड़ी आगजनी और लूटपाट की घटना के बावजूद अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इस पर भी पत्र में चिंता जताते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए हैं।
5 लाख की राहत राशि और नौकरी की मांग डॉ. सुनीलम ने कलेक्टर से मांग की है कि— पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की जाए नीतीश बचले को शासकीय नौकरी देकर पुनर्वास किया जाए परिवार को जीविकोपार्जन के लिए नया ठेला शुरू करने हेतु आर्थिक सहायता दी जाए पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि परिवार के पास संबल कार्ड और आयुष्मान कार्ड उपलब्ध हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है।

प्रशासन से मानवीय हस्तक्षेप की उम्मीद पूर्व विधायक ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि इस मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए पीड़ित परिवार को तत्काल राहत प्रदान की जाए। साथ ही, उन्होंने कलेक्टर से व्यक्तिगत रूप से परिवार से मिलकर सांत्वना देने की भी अपील की है।
निष्कर्षयह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।

