एक करोड़ के जीर्णोद्धार कार्य पर उठे सवाल, जल संग्रहण नहीं होने से नागरिकों में नाराजगी,
मुलताई। नगर पालिका मुलताई द्वारा अमरावती रोड स्थित नेहरू वार्ड के सूर्य नारायण सरोवर में जल संग्रहण सुनिश्चित करने के लिए लगभग एक करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई, लेकिन भारी-भरकम खर्च के बावजूद इस वर्ष भी सरोवर में पानी नहीं रुक सका। हालात यह रहे कि गर्मी शुरू होते ही सरोवर पूरी तरह सूख गया और उसमें “चिड़िया के पीने लायक पानी” तक संग्रहित नहीं हो पाया। इसे लेकर नगरवासियों में भारी नाराजगी है तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सरोवर छोटा कर छोड़ी गई शासकीय भूमि,
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जीर्णोद्धार के नाम पर सूर्य नारायण सरोवर की पुरानी सीमाओं को कम कर उसका आकार छोटा कर दिया गया। इससे करोड़ों रुपए मूल्य की शासकीय भूमि खाली हो गई, जिसे भविष्य में अतिक्रमण के लिए खुला छोड़ने जैसी स्थिति बन गई है। इस मुद्दे को लेकर नगर में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

तीन दशक पहले हुआ था निर्माण,
उल्लेखनीय है कि लगभग तीन दशक पूर्व ताप्ती सरोवर के गहरीकरण से निकली मुरम एवं मिट्टी से सूर्य नारायण सरोवर का निर्माण किया गया था। तब से लेकर अब तक नगर पालिका अलग-अलग समय में चार बार इस सरोवर के सुधार एवं जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है, लेकिन हर बार परिणाम निराशाजनक ही रहे हैं।

डीपीआर पर पहले भी उठे थे सवाल,
इस बार मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना 2.0 के अंतर्गत लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से सरोवर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव तैयार किया गया था। उस समय स्थानीय नागरिकों और समाचार पत्रों ने डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की तकनीकी खामियों को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद डीपीआर में कोर कट, पिचिंग तथा अन्य तकनीकी प्रावधान जोड़े गए और नगरवासियों को भरोसा दिलाया गया कि इस बार सरोवर में पर्याप्त जल संग्रहण होगा।हालांकि, बरसात समाप्त होते ही सरोवर फिर खाली हो गया, जिससे नगर पालिका के दावों पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

घटिया निर्माण और गुणवत्ता जांच पर सवाल,
जानकारों का कहना है कि तकनीकी सुधार किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीरता नहीं बरती गई। आरोप है कि कोर कट की चौड़ाई निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं रखी गई और उसमें उपयोग की गई काली मिट्टी की गुणवत्ता की नियमित जांच भी नहीं कराई गई।
इसके अलावा मिट्टी में उचित नमी बनाए रखकर लेयर कम्पेक्शन नहीं किए जाने की बात भी सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाता और नाला क्लोजर सही ढंग से होता, तो पहले ही वर्ष पानी का रुकना सुनिश्चित होता।

“पहले वर्ष पानी नहीं रुकना” तर्क पर भी सवाल,
नगर पालिका के उपयंत्री द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि पहला वर्ष होने के कारण पानी नहीं रुका और अगले वर्ष गाद जमने के बाद पानी रुक सकेगा। लेकिन सिंचाई विभाग से जुड़े तकनीकी जानकार इस दावे को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ हो तो पहले ही वर्ष जल संग्रहण होना चाहिए। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मिट्टी की गुणवत्ता, वेट टेस्ट, मॉइस्चर कंटेंट तथा कम्पेक्शन संबंधी रिकॉर्ड नगर पालिका के पास उपलब्ध हैं या नहीं, यह भी जांच का विषय है।

जांच और कार्रवाई की मांग,
नगरवासियों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, सरोवर का आकार कम किए जाने की जांच करने तथा दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि जनता के टैक्स का करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी यदि जल संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
इनका कहना
“मेरे मुलताई जॉइन करने से पहले ही सूर्य नारायण सरोवर का कार्य टॉप लेवल तक पहुंच चुका था। सरोवर को छोटा क्यों किया गया, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यह पहला वर्ष है, इसलिए पानी नहीं रुका। मुझे लगता है कि अगले वर्ष पानी अवश्य रुकेगा।”
— महेश शर्मा, उपयंत्री, नगर पालिका मुलताई

