करोड़ों की सड़कें उखड़ीं, बगीचा उजड़ा, पाइप लाइन अधर में; ठेका निरस्त होने के बाद उठे कई सवाल,
मुलताई। ताप्ती सरोवर में गंदा पानी जाने से रोकने के उद्देश्य से शुरू किया गया सीवर लाइन प्रोजेक्ट अब नगरवासियों के लिए भारी परेशानी और आक्रोश का कारण बनता जा रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद परियोजना अधूरी पड़ी है और ठेकेदार का ठेका निरस्त किए जाने के बाद पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

नगर पालिका द्वारा ठेका कंपनी की एफडी राजसात कर ली गई है, वहीं सीवर पाइप चोरी मामले में पुलिस ने ठेकेदार कंपनी से जुड़े दो लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। इसके बावजूद नगरवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि परियोजना के नाम पर उखाड़ी गई लगभग 10 करोड़ रुपए की सीमेंट-कंक्रीट सड़कें आखिर कब और कैसे सुधरेंगी। नगर के कई वार्डों में सड़कें क्षतिग्रस्त होने से लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात नजदीक होने से नागरिकों की चिंता और बढ़ गई है।
नगर पालिका परिसर का बगीचा उजाड़कर बना दिया गंदे पानी का गड्ढा
सीवर लाइन प्रोजेक्ट के तहत नगर पालिका परिसर में स्थित हरे-भरे बगीचे को भी नहीं बख्शा गया। यहां बगीचा उजाड़कर गंदे पानी के लिए बड़ा गड्ढा खोद दिया गया था। परियोजना अधर में लटकने के कारण अब यह स्थान बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। नगरवासियों का कहना है कि सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी कर लाखों रुपए की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन अब तक इसके पुनर्विकास या गड्ढे को भरने को लेकर कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है।

तीन वार्डों में बिछी पाइप लाइन का भविष्य भी अधर में,
नगर के तीन वार्डों में सीवर पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन प्रोजेक्ट बंद होने के बाद इन पाइप लाइनों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि परियोजना पूरी ही नहीं होनी थी, तो करोड़ों रुपए खर्च कर सड़कों को खोदने और पाइप लाइन बिछाने का औचित्य क्या था। जानकारी के अनुसार ठेकेदार को लगभग 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है, जबकि करीब 25 किलोमीटर लंबी सीमेंट-कंक्रीट सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे में केवल ठेका निरस्त कर कुछ लाख रुपए की एफडी जब्त करना क्या करोड़ों रुपए की बर्बादी की भरपाई कर पाएगा, यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

जांच और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
नगरवासियों और जनप्रतिनिधियों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि करोड़ों रुपए की इस परियोजना में समुचित मॉनिटरिंग और तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई। लोगों का कहना है कि जब तक डीपीआर तैयार करने वाली एजेंसी, मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी और बिना पर्याप्त भौतिक सत्यापन के करोड़ों रुपए का भुगतान करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नगर की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का भी यही हाल होता रहेगा।

पाइप चोरी मामले में भी नहीं दिखाई दी गंभीरता,
सीवर लाइन परियोजना से जुड़े पाइप चोरी मामले में भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नगर पालिका की शिकायत पर मुलताई पुलिस ने अपराध क्रमांक 239/24 के तहत धारा 454, 380 एवं 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया है। प्रकरण में —अभिषेक पिता शादीलाल कुशवाह, उम्र 31 वर्ष, निवासी पाटनदेव वार्ड क्रमांक 14, रायसेन,संजय पिता भीमजी भाई गौरसिया पटेल, उम्र 37 वर्ष, निवासी पुष्पराज बंग्लोस, निकोल, अहमदाबाद (गुजरात) को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामले में लाल रंग का ट्रक क्रमांक MH 40 CD 0063 जब्त किया था, जिसमें काले एवं केसरिया रंग के कुल 78 बड़े-छोटे प्लास्टिक पाइप बरामद किए गए। जब्त पाइपों की अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख 60 हजार रुपए बताई गई है।
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कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि मामले की गंभीरता से विवेचना की जाती तो इसमें अन्य महत्वपूर्ण धाराएं भी जोड़ी जा सकती थीं।
धारा 411 भादवि — चोरी की संपत्ति को बेईमानी से अपने कब्जे में रखना। धारा 414 भादवि — चोरी के माल को छिपाने, ले जाने या ठिकाने लगाने में सहायता करना। धारा 120-बी भादवि — आपराधिक षड्यंत्र। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह साबित होता है कि पाइप चोरी पूर्व नियोजित तरीके से की गई थी या आरोपियों को माल के चोरी का होने की जानकारी थी, तो इन धाराओं को जोड़ना उचित माना जा सकता था।

जनता पूछ रही — जिम्मेदार कौन.?
सीवर लाइन प्रोजेक्ट अब नगर में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद परियोजना अधूरी है, सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में नगरवासी यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन है और जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए की जवाबदेही तय कब होगी।
इनका कहना
“मामला हमारे समय का नहीं है, किंतु नगर पालिका के सीवर लाइन पाइप चोरी मामले में मुलताई पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश कर दिया है।”
नरेन्द्र सिंह परिहार थाना प्रभारी मुलताई
“मैं और सीएमओ ने इस संबंध में कमिश्नर साहब से भेंट कर प्रोजेक्ट की जानकारी दी है। उन्हें पुराने प्रोजेक्ट की स्थिति, टूटी हुई सड़कों और नगर पालिका परिसर के सामने खोदे गए गड्ढे से अवगत कराया गया है। उन्होंने दोबारा सर्वे कराकर नई डीपीआर बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, किंतु अब तक विभागीय पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।” — योगेश अनेराव, उपयंत्री, नगर पालिका मुलताई
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