निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक से बढ़ी परेशानी, 500 आवेदन अटके,
मुलताई। विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उत्कृष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने तथा उनके सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय जैसी महत्वाकांक्षी शिक्षा परियोजना संचालित की जा रही है। इसी योजना के तहत मुलताई नगर में लगभग 44 करोड़ रुपए की लागत से हिंदी एवं इंग्लिश माध्यम का अत्याधुनिक विद्यालय भवन बनाया जा रहा है,
जिसकी क्षमता 2380 विद्यार्थियों की होगी। विद्यार्थियों को दूर-दराज क्षेत्रों से विद्यालय तक लाने के लिए 18 बसों की व्यवस्था भी की गई है, ताकि “बच्चे स्कूल नहीं पहुंचें तो स्कूल बच्चों तक पहुंचे” की अवधारणा को साकार किया जा सके। हालांकि यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह परवान चढ़ पाती, उससे पहले ही नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। निजी स्कूलों से आने वाले विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक लगने के कारण सैकड़ों पालक और विद्यार्थी परेशान होकर विद्यालय एवं शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं।

500 विद्यार्थियों के आवेदन, लेकिन प्रवेश पर रोक,
जानकारी के अनुसार सांदीपनि विद्यालय मुलताई में नए सत्र के लिए लगभग 500 विद्यार्थियों ने प्रवेश हेतु आवेदन किया है। इनमें बड़ी संख्या उन विद्यार्थियों की है जो निजी स्कूलों से अध्ययन कर आगे की पढ़ाई के लिए सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश लेना चाहते हैं। लेकिन विद्यालय प्रबंधन ने इन विद्यार्थियों को यह कहते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। इस आदेश के चलते स्थिति यह बन गई है कि विद्यालय में सीटें रिक्त होने के बावजूद जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर पालकों में आक्रोश और असंतोष बढ़ता जा रहा है।

इंग्लिश मीडियम सीटें खाली रहने का खतरा,
मुलताई क्षेत्र में इंग्लिश माध्यम की शिक्षा के विकल्प सीमित हैं। सांदीपनि विद्यालय के अलावा क्षेत्र में केवल एक निजी इंग्लिश माध्यम स्कूल संचालित है, जहां से मात्र 20 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। ऐसी स्थिति में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिलेगा तो सांदीपनि विद्यालय अपनी इंग्लिश माध्यम की सीटें कैसे भरेगा। विद्यालय में कक्षा 9वीं से 12वीं तक इंग्लिश माध्यम में प्रवेश क्षमता 565 विद्यार्थियों की बताई जा रही है। वर्तमान में यहां 445 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और हाल ही में घोषित परीक्षा परिणामों के बाद यह संख्या और घटने की संभावना जताई जा रही है। इसके बावजूद रिक्त सीटों पर नए विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जा पा रहा है।

पालकों के दबाव में शिक्षा अधिकारी भी परेशान
प्रवेश को लेकर उपजे विवाद ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की परेशानी भी बढ़ा दी है। पालक लगातार सहायक संचालक, बीईओ तथा विद्यालय प्राचार्य से संपर्क कर अपने बच्चों के प्रवेश की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शासन के स्पष्ट आदेश होने के कारण वे नियमों का उल्लंघन कर निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दे सकते। वहीं दूसरी ओर हर पालक को नियमों की जटिलता समझाना भी आसान नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि कई पालकों ने हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायतें दर्ज कराना शुरू कर दिया है, जिससे शिक्षा विभाग पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।

गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर संकट
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चिंता शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लेकर जताई जा रही है। ज्ञात हो कि शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा दी जाती है, जिसकी फीस का भुगतान शासन द्वारा किया जाता है। लेकिन अब जब ये विद्यार्थी कक्षा 8वीं उत्तीर्ण कर आगे की पढ़ाई के लिए सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश लेना चाह रहे हैं, तब निजी स्कूल से आने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में गरीब परिवारों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है, क्योंकि वे निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन करने में सक्षम नहीं हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि इन विद्यार्थियों को सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश नहीं मिला तो उनकी आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

इनका कहना
शिक्षा पर सभी का समान अधिकार होना चाहिए। बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक विद्यार्थी को उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो सके, इसी उद्देश्य से कांग्रेस सरकार ने शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू किया था। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक लगाना शिक्षा अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है। शासन को नियमों का सरलीकरण करते हुए सभी पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश देने का रास्ता निकालना चाहिए।
सुखदेव पांसे पूर्व मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष
सहायक संचालक एवं बीईओ मुलताई सक्षम बारमाटे ने बताया कि सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश को लेकर लगातार पालकों के फोन आ रहे हैं तथा कई हेल्पलाइन शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया है, ताकि इंग्लिश माध्यम की रिक्त सीटों को भरने के लिए उचित निर्णय लिया जा सके।
सक्षम बारमाटे सहायक संचालक एवं बीईओ मुलताई
शासन के आदेश के अनुसार निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक लगी हुई है, इसलिए विद्यालय प्रबंधन प्रवेश देने में असमर्थ है। लगभग 500 आवेदन प्राप्त हुए हैं सभी सभी आवेदन करता विद्यार्थी निजी विद्यालय के है पूरी स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
संदीप गणेशे प्राचार्य सांदीपनि विद्यालय मुलताई
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