सीवर लाइन प्रोजेक्ट बना मुलताई वासियों के लिए मुसीबत, अधूरा काम छोड़ गायब हुआ ठेकेदार,एफआईआर के प्रस्ताव के बाद भी कार्रवाई नहीं, बिना भौतिक सत्यापन करोड़ों के भुगतान पर उठे सवाल,
मुलताई। ताप्ती सरोवर को घरों से निकलने वाले गंदे पानी से बचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया सीवर लाइन प्रोजेक्ट अब नगरवासियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई इस योजना में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। नगरवासियों का आरोप है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद शहर को टूटी सड़कें, बदहाल व्यवस्था और बर्बाद हुआ हराभरा परिसर ही मिला है।

जानकारी के अनुसार सीवर लाइन प्रोजेक्ट के तहत ठेकेदार को लगभग 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन इसके बदले नगर को लगभग 10 करोड़ रुपए की क्षतिग्रस्त सड़कें और नगर पालिका परिसर में बने हरित उद्यान की बर्बादी झेलनी पड़ रही है। नगर पालिका परिसर में पहले जहां हरे-भरे वृक्ष और सुंदर बगीचा था, वहां अब गंदे पानी से भरा गहरा गड्ढा बना हुआ है। इस गड्ढे से उठने वाली दुर्गंध के कारण परिसर में खड़ा रहना तक मुश्किल हो गया है।
नई बनी सड़कें भी खोद दी गईं,
ताप्ती पटेल वार्ड और इंदिरा गांधी वार्ड सहित कई क्षेत्रों में सीवर लाइन डालने के नाम पर सड़कें खोद दी गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से अधिकांश सड़कें छह माह से एक वर्ष पहले ही बनाई गई थीं। सड़कें तोड़ने के बाद उनका समुचित मरम्मत कार्य नहीं किया गया, जिसके कारण तीन वार्डों के रहवासी लंबे समय से परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

नगरवासियों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा किया गया प्रारंभिक निर्माण कार्य भी अब किसी उपयोग का नहीं रह गया है। ऐसे में नगर पालिका को पुनः समतलीकरण और मरम्मत कार्य पर अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ेगी।ठेकेदार पर एफआईआर का प्रस्ताव, फिर भी नहीं हुई कार्रवाईसीवर लाइन प्रोजेक्ट अधूरा छोड़कर गायब हुए ठेकेदार के खिलाफ नगर पालिका परिषद में पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने सर्वसम्मति से एफआईआर दर्ज कराने का प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नगरवासियों का कहना है कि बिना सीवर लाइन की टेस्टिंग और बिना भौतिक सत्यापन के करोड़ों रुपए का भुगतान आखिर कैसे कर दिया गया। साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि परियोजना की राशि का मद परिवर्तन क्यों किया गया और संचित निधि से 1 करोड़ 4 लाख रुपए का भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया।

डीपीआर में सड़क सुधार शामिल, फिर भी नहीं कराया गया काम
जानकारों के अनुसार सीवर लाइन परियोजना की डीपीआर में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों का सुधार कार्य भी ठेकेदार द्वारा किया जाएगा। इसके बावजूद भुगतान करने में जल्दबाजी दिखाई गई और सड़क सुधार कार्य पूर्ण कराए बिना ही ठेकेदार को राशि जारी कर दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य व्यक्ति अपने घर में छोटी पाइपलाइन बिछाने पर भी जांच के बाद भुगतान करता है, लेकिन यहां जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए बिना गुणवत्ता परीक्षण और भौतिक सत्यापन के ही जारी कर दिए गए।

भुगतान के बाद पाइपलाइन सामग्री ले जाने का आरोप, मामला दर्ज,
मामले में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। आरोप है कि लगभग एक करोड़ रुपए का भुगतान मिलने के बाद ठेकेदार ने परियोजना स्थल से अपनी सामग्री हटाना शुरू कर दिया था। इसी दौरान वह सीवर लाइन के वे पाइप भी ट्रक में भरकर ले जा रहा था, जिनका भुगतान नगर पालिका पहले ही कर चुकी थी। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष वर्षा गढ़ेकर को इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने थाना मुलताई में ठेकेदार संजय पटेल एवं अभिषेक पटेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने वाहन एवं पाइप जब्त कर दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला पंजीबद्ध करते हुए प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया।अब देखना यह होगा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस गंभीर मामले में आगे क्या कार्रवाई करते हैं।

इनका कहना
हमने सीवर लाइन ठेकेदार का काम टर्मिनेट कर दिया है।एफडीआर राजसात कर ली है ।जहां तक परिषद प्रस्ताव में एफआईआर का सवाल है मै देख लेता हूं कि क्या हो सकता है।
वीरेंद्र तिवारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी मुलताई
“पाइपलाइन चोरी मामले में कार्रवाई की गई”
“पुलिस ने पाइपलाइन चोरी के मामले में वाहन और पाइप जब्त कर दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया है। वाहन की सुपुर्दगी हो चुकी है।”— नरेंद्र सिंह परिहार, थाना प्रभारी मुलताई
“सर्वसम्मति से एफआईआर का प्रस्ताव पारित हुआ था”
“मेरे कार्यकाल में सभी दलों के पार्षदों ने सर्वसम्मति से सीवर लाइन ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर कराने का प्रस्ताव पारित किया था। अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई करना थी। पाइप चोरी के मामले में भी हमने संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी।”
— वर्षा गढ़ेकर, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, मुलताई

