भाजपा नेताओं और माँ ताप्ती मंदिर ट्रस्ट ने एसडीएम को सौंपे ज्ञापन, कहा- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला
मुलताई। माँ ताप्ती नदी के उद्गम स्थल के समीप स्थित ऐतिहासिक नारद टेकड़ी की भूमि को लेकर विवाद अब तूल पकड़ने लगा है। नगर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी इस भूमि के सीमांकन तथा कथित क्रय-विक्रय को लेकर चल रही चर्चाओं ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका परिषद के जनप्रतिनिधियों तथा माँ ताप्ती मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए अलग-अलग ज्ञापन सौंपे हैं। नगर पालिका परिषद मुलताई की अध्यक्ष नीतू परमार एवं पार्षद वर्षा गडेकर की उपस्थिति में माँ ताप्ती मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) राजीव कहार को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया गया कि माँ ताप्ती नदी का उद्गम स्थल ताप्ती सरोवर के उत्तर दिशा में स्थित है, जिसे प्राचीन काल से नारद टेकड़ी के नाम से जाना जाता है और यह क्षेत्र धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि हाल ही में विभिन्न समाचार माध्यमों के जरिए यह जानकारी सामने आई है कि नारद टेकड़ी क्षेत्र से संबंधित भूमि का क्रय-विक्रय किया जा रहा है। इस सूचना के बाद श्रद्धालुओं और नागरिकों में आशंका व्याप्त हो गई है कि यह भूमि माँ ताप्ती उद्गम स्थल से जुड़ी भूमि है। यदि ऐसा है, तो इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

भाजपा नेताओं एवं ट्रस्ट पदाधिकारियों ने अपने आवेदन में कहा कि माँ ताप्ती नदी का उद्गम स्थल देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए इस क्षेत्र की भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो भविष्य में विवाद और गहरा सकता है। दोनों ज्ञापनों में प्रशासन से मांग की गई है कि नारद टेकड़ी एवं ताप्ती उद्गम स्थल क्षेत्र का राजस्व अभिलेखों के आधार पर विधिवत सीमांकन कराया जाए, संबंधित भूमि को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाए तथा जांच पूरी होने तक विवादित अथवा संबंधित भूमि की रजिस्ट्री और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं पर अस्थायी रोक लगाई जाए।

ज्ञापन की प्रतिलिपियां उप पंजीयक कार्यालय तथा मुख्य नगरपालिका अधिकारी को भी भेजी गई हैं। फिलहाल नगरवासियों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। नागरिकों और श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि प्रशासन शीघ्र जांच कर उद्गम स्थल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा तथा धार्मिक महत्व की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा

आस्था की जमीनों पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल,
मुलताई की पहचान माँ ताप्ती की उद्गम स्थली और पवित्र नगरी के रूप में है। नगर में स्थित ताप्ती कुंड, मठ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल न केवल श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं, बल्कि उनसे जुड़ी भूमि भी धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। समय के साथ नगर का विस्तार हुआ और इन स्थलों के आसपास की जमीनों का बाजार मूल्य करोड़ों रुपये तक पहुंच गया। इसके साथ ही इन जमीनों पर कब्जे और स्वामित्व को लेकर विवाद भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में मुख्य मार्ग से लगी ताप्ती जल मार्ग की शासकीय भूमि के पट्टे आवंटित किए गए थे, जिनकी वर्तमान कीमत करोड़ों रुपये आंकी जाती है।

इन भूमि आवंटनों के बाद आज वहां बड़े-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान और शोरूम संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार कुछ वर्ष पूर्व राम मंदिर ट्रस्ट की भूमि के कथित क्रय-विक्रय को लेकर भी नगर में व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला था। विरोध प्रदर्शन और जनदबाव के बाद प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी थी। उस घटना के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि धार्मिक आस्था और सार्वजनिक महत्व से जुड़ी भूमि के मामलों में भविष्य में अधिक सतर्कता बरती जाएगी। हालांकि पिछले दो दिनों से नारद टेकड़ी क्षेत्र की भूमि के कथित विक्रय को लेकर चल रही चर्चाओं ने एक बार फिर नगर का माहौल गर्मा दिया है।


