सर्वर फेल, अव्यवस्थाएं हावी—किसानों को दो-दो दिन भटकना पड़ रहा, ट्रकों में भरा चना अटका,
मुलताई। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर दिलाने और खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर चना खरीदी शुरू की गई है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। अव्यवस्थित खरीदी केंद्र, तकनीकी खामियां और मूलभूत सुविधाओं की कमी ने इस पूरी व्यवस्था को किसानों के लिए बड़ी परेशानी बना दिया है।
सर्वर समस्या से ठप पड़ी खरीदी प्रक्रिया,
किसानों का कहना है कि पोर्टल पर लगातार सर्वर डाउन रहने के कारण स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है। इसके चलते किसान अपनी उपज बेचने के लिए दो-दो दिनों तक मंडी में भटकने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं, सर्वर की समस्या के कारण बिलिंग प्रक्रिया भी पूरी तरह बाधित हो रही है, जिससे खरीदा गया चना परिवहन के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

एक ही स्थान पर गेहूं-चना खरीदी, जगह कम,
कृषि उपज मंडी परिसर में एक ही स्थान पर गेहूं और चना दोनों की खरीदी की जा रही है। किसानों के अनुसार यह स्थल एक फसल की खरीदी के लिए भी पर्याप्त नहीं है, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ रही है। मंडी में किसानों के लिए पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, जिससे उनकी परेशानी दोगुनी हो रही है। परिवहन भी प्रभावित, ट्रक खड़े-खड़े हो रहे खराब-सर्वर और बिलिंग की समस्या का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ट्रक मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ट्रक मालिक संजू रघुवंशी के अनुसार, उनके 10 चक्का ट्रक (क्रमांक MP 09 F 3948) में करीब 250 क्विंटल चना पिछले दो दिनों से लोड है, लेकिन बिलिंग न होने के कारण ट्रक वहीं खड़ा है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है-समिति ने अब तक खरीदा 3066 क्विंटल चना कृषि उपज मंडी परिसर में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी का कार्य बहुउद्देशीय सेवा सहकारी समिति मर्यादित परमंडल द्वारा किया जा रहा है।

संस्था प्रबंधक देवीदास नरवरे के अनुसार, 8 अप्रैल से शुरू हुई खरीदी में अब तक 3066 क्विंटल चना खरीदा जा चुका है। समिति अपने संसाधनों के माध्यम से सुबह से रात तक अधिक से अधिक किसानों की उपज खरीदने का प्रयास कर रही है।
किसानों की मांग—नजदीकी गोदामों को बनाया जाए खरीदी केंद्र– किसानों ने मांग की है कि भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए नजदीकी उपज गोदामों को भी खरीदी केंद्र बनाया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके और खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।
इनका कहना
“सर्वर, स्लॉट बुकिंग, बिलिंग और स्थान की समस्याएं हमारे स्तर की नहीं हैं। इसके बावजूद हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि अधिक से अधिक किसानों की उपज समय पर खरीदी जा सके।”
— देवीदास नरवरे,
संस्था प्रबंधक, बहुउद्देशीय सेवा सहकारी समिति मर्यादित परमंडल, मुलताई

