नारद टेकड़ी को संरक्षित धरोहर घोषित करने की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,

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संगठन ने आशंका जताई है कि क्षेत्र का निजी स्वार्थों के लिए क्रय-विक्रय अथवा हस्तांतरण किया जा सकता है, जिससे इस महत्वपूर्ण धरोहर के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है। ज्ञापन में बताया गया है कि नारद टेकड़ी मां ताप्ती नदी के पावन उद्गम क्षेत्र के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है।

स्थानीय जनश्रुतियों, पुराणों और परंपराओं के अनुसार यह वही स्थान माना जाता है जहां देवर्षि नारद मुनि ने तपस्या की थी। इसी कारण यह स्थल क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। जन आंदोलन मंच ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो यह अमूल्य धरोहर भविष्य में नष्ट होने की स्थिति में पहुंच सकती है।

संगठन ने मांग की है कि नारद टेकड़ी का पुरातत्व विभाग द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाए तथा इसके ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का परीक्षण कर आवश्यक अभिलेख तैयार किए जाएं। ज्ञापन में नारद टेकड़ी को संरक्षित धरोहर घोषित करने, भूमि के किसी भी प्रकार के विक्रय, हस्तांतरण अथवा अतिक्रमण पर तत्काल रोक लगाने तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, इतिहासकारों और नागरिकों की समिति बनाकर संरक्षण एवं विकास की कार्ययोजना तैयार करने की भी मांग की गई है।

जन आंदोलन मंच ने कहा कि नारद टेकड़ी केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक विरासत भी है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए प्रशासन द्वारा शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई किया जाना जनहित में आवश्यक है। ज्ञापन सौपने वालों में लोकेश रवि यादव, मनीष माथनकर ,चिन्टू खन्ना, अजय यादव,राजू पाटनकर, मयंक पाठक, संतोष कामड़ी, अजेन्द्र सिंह परिहार, शुभम जैन, प्रकाश गीरारे, आदिश्वर शर्मा, महेश परिहार, निखिल जैन, अक्षत भार्गव, साकेत पुरी,आदि प्रमुख है।

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