विश्व आदिवासी दिवस पर मुलताई में गूंजा एकता और संस्कृति का संदेश,

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भव्य रैली में उमड़ा आदिवासी समाज पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, समाजजन, डीजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर थिरके युवा; डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और मां ताप्ती की आरती के बाद मुख्य कार्यक्रम स्थल पहुंची रैली

मुलताई। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को मुलताई में आदिवासी समाज द्वारा भव्य रैली निकालकर एकता, सामाजिक सौहार्द, संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं का संदेश दिया गया। रैली में मुलताई सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाजजन शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और डीजे एवं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन से नगर का वातावरण आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।

प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज के लोग कृषि उपज मंडी परिसर में एकत्रित हुए। दोपहर करीब 12 बजे रैली की शुरुआत से पूर्व समाजजनों ने अंबेडकर चौक पहुंचकर संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद रैली विधिवत रूप से प्रारंभ हुई।

रैली में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। डीजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर समाजजन उत्साहपूर्वक नृत्य करते हुए आगे बढ़े। रैली में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की आकर्षक झलक देखने को मिली। युवाओं में विशेष उत्साह नजर आया और पूरे मार्ग पर समाज की एकजुटता का संदेश दिखाई दिया। अंबेडकर चौक से प्रारंभ हुई रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बैतूल रोड की ओर आगे बढ़ी। इस दौरान जगह-जगह लोगों ने रैली का स्वागत किया।

रैली के बीच हुई हल्की बारिश भी समाजजनों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग पूरे उत्साह के साथ रैली में शामिल रहे। रैली के दौरान समाजजन जयस्तंभ चौक स्थित ताप्ती आरती घाट पहुंचे। यहां मां ताप्ती की विधि-विधान से आरती की गई। आरती के बाद रैली पुनः बैतूल रोड स्थित मुख्य कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हुई।

इस दौरान मां ताप्ती के प्रति आस्था और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। रैली के दौरान सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिली। सेन समाज की ओर से प्रभाकर बोरकर एवं उनके साथियों ने रैली में शामिल आदिवासी समाजजनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। पुष्पवर्षा के माध्यम से सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया।

रैली के बैतूल रोड स्थित मुख्य कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद सांस्कृतिक एवं मंचीय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और लोक कला की झलक देखने को मिली। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज की परंपराओं और विरासत को प्रस्तुत किया गया।

विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन को लेकर समाजजनों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, युवा, महिलाएं एवं अन्य समाजजन शामिल हुए। आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज ने अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और सामाजिक एकता को मजबूती से प्रदर्शित किया।

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