भाजपा ने “अंतिम लड़ाई” जीती: नीतू परमार की घर वापसी से मुलताई की राजनीति में नया मोड़,

0

मुलताई। मुलताई की राजनीति हमेशा से अप्रत्याशित घटनाक्रमों और चौंकाने वाले राजनीतिक परिणामों के लिए पहचानी जाती रही है। एक बार फिर ऐसा ही घटनाक्रम सामने आया है, जिसने क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। नगर पालिका अध्यक्ष नीतू प्रहलाद परमार ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी में घर वापसी कर ली है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प और चर्चित पहलू यह रहा कि भाजपा में शामिल होते समय पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष वर्षा गढ़ेकर भी उनके साथ मंच पर मौजूद थीं। इतना ही नहीं, दोनों महिला नेताओं ने संयुक्त बयान भी जारी किया। राजनीतिक गलियारों में यह दृश्य इसलिए विशेष माना जा रहा है, क्योंकि नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच करीब साढ़े तीन वर्षों तक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई चली थी।

दरअसल, 15 पार्षदों वाली मुलताई नगर पालिका परिषद में भाजपा का बहुमत था। अध्यक्ष पद महिला सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित था और भाजपा ने वर्षा गढ़ेकर को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। लेकिन भाजपा पार्षद नीतू परमार ने पार्टी के इस निर्णय से असहमति जताते हुए वर्षा गढ़ेकर के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर लिया।

इसके बाद नगर पालिका की राजनीति में समीकरण पूरी तरह बदल गए। भाजपा बहुमत वाली परिषद में कांग्रेस के समर्थन से नीतू परमार को 9 मत प्राप्त हुए और वे नगर पालिका अध्यक्ष निर्वाचित हो गईं। अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे की मौजूदगी में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।

दूसरी ओर, अध्यक्ष पद के निर्वाचन को चुनौती देते हुए वर्षा गढ़ेकर ने मुलताई न्यायालय में याचिका दायर की। इसके बाद यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इस दौरान राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम लगातार बदलते रहे। दो बार नीतू परमार ने नगर पालिका अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, वहीं दो बार शासन द्वारा वर्षा गढ़ेकर की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की गई।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नीतू परमार के पक्ष में आया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतू परमार ने यह लंबी लड़ाई कांग्रेस के समर्थन से जीती, लेकिन अंततः भाजपा ने उन्हें पुनः पार्टी में शामिल कर “अंतिम राजनीतिक जीत” अपने नाम कर ली। अब इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के उन कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल दिया है, जो बीते वर्षों में अपने-अपने नेताओं के समर्थन में एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाते रहे थे। फिलहाल नीतू परमार की भाजपा में वापसी को मुलताई की राजनीति में आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here