क्यों बुझाई जाती है जन्मदिन पर मोमबत्ती,

0

भोपाल हम इंडिया एडिटोरियल टीम- जन्मदिन का उत्सव आज पूरी दुनिया में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। केक काटना, मोमबत्तियाँ जलाना और फिर उन्हें बुझाकर मनोकामना मांगना अब लगभग हर जन्मदिन समारोह का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर जन्मदिन पर केक के ऊपर मोमबत्तियाँ जलाकर उन्हें बुझाने की परंपरा शुरू कैसे हुई और इसके पीछे क्या मान्यताएँ हैं।

इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा प्राचीन यूनान से जुड़ी मानी जाती है। वहां लोग चंद्रमा की देवी Artemis को प्रसन्न करने के लिए गोल आकार के केक चढ़ाते थे। केक के ऊपर जलाई गई मोमबत्तियाँ चंद्रमा की चमक का प्रतीक मानी जाती थीं। ऐसी मान्यता थी कि मोमबत्तियों से उठने वाला धुआँ लोगों की प्रार्थनाओं और इच्छाओं को देवताओं तक पहुंचाता है।

बाद में यह परंपरा यूरोप के कई देशों तक पहुंची। विशेष रूप से Germany में मध्यकालीन समय में जन्मदिन को व्यक्ति के जीवन का संवेदनशील दिन माना जाता था। लोगों का विश्वास था कि इस दिन बुरी शक्तियां या नकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए मोमबत्तियों की रोशनी को सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना गया। मोमबत्तियां जलाकर और फिर उन्हें बुझाकर अच्छे भविष्य की कामना की जाती थी।

वर्तमान समय में केक पर लगी मोमबत्तियां व्यक्ति की आयु का भी प्रतीक बन चुकी हैं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के जन्मदिन पर उम्र के अनुसार मोमबत्तियां लगाने की परंपरा देखी जाती है। हालांकि अब बड़ी संख्या की जगह “नंबर कैंडल” का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार मोमबत्ती बुझाने की इस परंपरा का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इससे वास्तव में इच्छाएं पूरी होती हैं, लेकिन यह लोगों की भावनाओं, खुशियों और उत्सव की संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। वहीं कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मोमबत्ती बुझाते समय केक पर सूक्ष्म जीवाणु गिर सकते हैं, इसलिए स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है।कुल मिलाकर जन्मदिन पर मोमबत्ती जलाना और बुझाना केवल एक रस्म नहीं बल्कि खुशी, उम्मीद, शुभकामना और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here