प्रकाश सूर्यवंशी
नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो अभियान के तहत निकाला जागरूकता रेली, सार्वजनिक आयोजनों में भी शराब पर प्रतिबंध की मांग,
मुलताई। तहसील क्षेत्र के ग्राम दुनावा में महिलाओं ने शराब के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एकजुट होकर बड़ा कदम उठाया है। ग्रामीण महिलाओं ने गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का निर्णय लेते हुए इसके समर्थन में जागरूकता रैली एवं जुलूस का आयोजन किया। महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है तथा युवाओं का भविष्य भी संकट में पड़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” मंडल की महिलाओं ने ग्राम में बैठक आयोजित कर शराबबंदी के पक्ष में सर्वसम्मति से निर्णय लिया। बैठक में महिलाओं ने शराब को सामाजिक बुराई बताते हुए इसके विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया।
मंडल की अध्यक्ष रामप्यारी कवाची ने कहा कि शराब के बढ़ते प्रचलन से गांव का माहौल खराब हो रहा है। कई परिवार आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की लत से बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए महिलाओं ने एकजुट होकर शराबबंदी की दिशा में पहल की है।

निर्णय के बाद सभी महिलाएं ग्राम पंचायत परिसर के सामने एकत्रित हुईं। इसके पश्चात पुलिस प्रशासन के सहयोग से जागरूकता जुलूस निकाला गया, जिसने पूरे गांव का भ्रमण किया। जुलूस के दौरान महिलाओं ने वैध एवं अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने तथा नशामुक्त समाज के निर्माण के समर्थन में जोरदार नारे लगाए। महिलाओं ने मांग की कि गांव में ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक कार्यक्रमों, शादी-विवाह एवं अन्य सामाजिक आयोजनों में भी शराब के सेवन और परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उनका मानना है कि इससे समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा और नई पीढ़ी को नशे की बुराई से बचाया जा सकेगा।

इस अवसर पर जनपद पंचायत सदस्य बबीता हरेंद्र उपराले ने भी महिलाओं के अभियान को समर्थन एवं सहयोग प्रदान किया। जुलूस में रामप्यारी कवाची, पार्वती कुरवाडे, कौशल पवार, लता पवार, पूनम भलावी, संकरिया मंदरे, लीला विश्वकर्मा, शीला नर्रे, संगीता पवार, चंद्रकला भलावी, अंजू खडसे, चंद्रकांता डोंगरे, सीमा कवाची, रेखा पवार, सुनीता बुवाड़े, ज्योति पवार, फुलवंती बाई, पूनम, संगीता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका यह अभियान केवल शराबबंदी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव को नशामुक्त बनाने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।



