सिंचाई विभाग द्वारा नदी-नालों में छोड़ा जा रहा वर्धा का पानी
मुलताई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित वर्धा सिंचाई परियोजना ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। परियोजना का नल-जल घटक अब तक अधर में लटका हुआ है, वहीं बांध घटक को लेकर भी सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विशेष रूप से वर्धा बांध में संचित जल के प्रबंधन को लेकर ग्राम सलाईढाना, कोडर एवं चिचंडा के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
किसानों का कहना है कि वर्धा बांध निर्माण में सर्वाधिक भूमि इन्हीं तीन गांवों के किसानों की अधिग्रहित की गई थी। शेष बची भूमि पर किसान लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से फसल उत्पादन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी जानबूझकर किसानों को लिफ्ट सिंचाई का लाभ न मिल सके, इसके लिए वर्धा बांध का पानी अंबोरी नदी में छोड़ा जा रहा है। यह पानी गोपाल तलाई से नरखेड़ के मध्य स्थित नालों में भी प्रवाहित किया जा रहा है।

आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से एक निजी ब्लूबेरी कंपनी को बिना समुचित नाप-तौल के जल उपलब्ध कराया जा रहा है। कंपनी अपने व्यावसायिक उपयोग हेतु पानी ले रही है, जिससे किसानों की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। इसी कारण वर्धा बांध का जलस्तर तेजी से घट रहा है। एक ओर वर्धा का पानी नदी-नालों एवं कंपनी के उपयोग में जा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान सिंचाई के लिए पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं।

अंबोरी नदी में 10 किलोमीटर तक फैला पानी
ग्राम चिचंडा निवासी मनोज कसारे, मुकेश रबड़े, सुरेंद्र रेबड़े, सुनील पवार, राजू कोड़ले, हरिराम भलावी, ग्राम सलाईढाना निवासी चंदन बरखड़े, राहुल बरखड़े, सोमनाथ बरखड़े, तथा ग्राम कोडर निवासी गुड्डू महाजन, मारुति बेले, नरेंद्र बेले एवं श्रीराम बेले ने बताया कि तीनों गांवों के किसानों को सिंचाई हेतु पानी नहीं मिल रहा है। किसानों का कहना है कि विभाग एक ओर नदी-नालों के माध्यम से पानी बहा रहा है, वही पिछले दो माह से नहर लगातार चालू रखी गई है।

सिंचाई विभाग समय पर नहर खोलने और बंद करने की व्यवस्था तक नहीं कर पा रहा, जिससे भारी मात्रा में जल अपव्यय हो रहा है। किसान चंदन बरखड़े ने बताया कि जब भी किसानो को किसी समस्या को लेकर सिंचाई अधिकारियों से संपर्क करना होता है, वर्धा बांध के एसडीओ चौहान फोन नहीं उठाते। उल्लेखनीय है कि एसडीओ चौहान एक दशक से अधिक समय से मुलताई सिंचाई विभाग में पदस्थ हैं। इस दौरान कई चुनाव और स्थानांतरण हुए, किंतु वे यहीं बने रहे। किसानों का आरोप है कि इतने वर्षों बाद भी वे किसानों की समस्याओं को समझने के लिए तैयार नहीं हैं।वहीं, इस संबंध में सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री सी.एल. मरकाम का कहना है कि सिंचाई अधिकारी किसानों के फोन उठाने के लिए बाध्य नहीं हैं। फोन हमारी निजी सुविधा के लिए रखे जाते हैं।
इनका कहना
“वर्धा बांध से नदी-नालों में छोड़ा जाने वाला पानी पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से आवश्यक होता है। जल संसाधन विभाग में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। ब्लूबेरी कंपनी को पानी अवैध रूप से नहीं दिया जा रहा है, उनके पास वैध अनुमति है।”
— सी.एल. मरकाम
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, मुलताई

