गरीबी से जंग जीतकर बनी डॉक्टर: दुर्गा पवार की सफलता बनी मिसाल,

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मुलताई। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी इंसान का रास्ता नहीं रोक सकतीं। इस कथन को चरितार्थ कर दिखाया है मुलताई की होनहार बेटी दुर्गा पवार ने, जिन्होंने अभावों और संघर्षों के बीच अपने सपनों को न सिर्फ जिंदा रखा, बल्कि उन्हें साकार कर एक नई मिसाल कायम कर दी।

दुर्गा के बचपन में ही उनके पिता का साया सिर से उठ गया। इस कठिन समय में परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी माँ सुमन पवार के कंधों पर आ गई। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उन्हें दूसरों के घरों में बर्तन साफ करना, झाड़ू-पोछा करना जैसे काम कर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ा। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने न तो माँ के हौसले तोड़े और न ही बेटी के सपनों को कमजोर होने दिया।

जब स्कूल में दाखिले का समय आया, तो फीस उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ी थी। ऐसे में स्कूल प्रबंधन बना सहारा इसी दौरान सुमन पवार शहर के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल पहुँचीं। वहाँ स्कूल संचालक अनीश नायर ने दुर्गा की प्रतिभा को पहचानते हुए उसकी पढ़ाई में हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। यह सुनकर एक माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गए—मानो वर्षों का संघर्ष रंग लाने लगा हो।

दुर्गा ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर NEET जैसी कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश पाया। उन्होंने People’s यूनिवर्सिटी, भोपाल से वर्ष 2025-26 बैच में अपनी पढ़ाई सफलतापूर्वक पूर्ण की।
इतना ही नहीं, उन्होंने अपने संस्थान में द्वितीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।माँ की तपस्या और बेटी की मेहनत का परिणाम यह सफलता केवल एक डिग्री हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक माँ की तपस्या, त्याग और अटूट विश्वास का परिणाम है। दुर्गा ने न केवल डॉक्टर बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया, बल्कि मुलताई शहर का नाम भी गौरवान्वित किया।
अब वह एक प्रतिभावान डेंटल सर्जन के रूप में समाज की सेवा के लिए तैयार हैं।

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