करोड़ों की वर्धा सिंचाई परियोजना बनी ‘सफेद हाथी’, चार गांवों के सैकड़ों किसान सड़कों पर उतरे,

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मुलताई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित वर्धा सिंचाई परियोजना अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी के चलते क्षेत्र के किसानों के लिए अब तक वरदान साबित नहीं हो सकी है। परियोजना के आसपास बसे गांवों में इसे लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। सोमवार को वर्धा डेम से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित गोपालतलाई, चौथिया, सोनोली और जामगांव के सैकड़ों किसान अपने गांवों को वर्धा बांध की मुख्य नहर से जोड़ने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए।

किसानों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सिंचाई विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान “नहर दो नहीं तो जहर दो” जैसे तीखे नारों से तहसील परिसर गूंज उठा। चारों गांवों के किसान तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र नहर से जोड़ने की मांग की।किसानों का कहना है कि उनके गांव वर्धा डेम से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, इसके बावजूद उन्हें मुख्य नहर से नहीं जोड़ा गया। जबकि वर्धा डेम की नहर उनके गांवों से होकर आगे 30 से 40 किलोमीटर दूर अन्य गांवों तक पहुंचाई गई है। इससे क्षेत्र के किसानों में भारी असंतोष है।


ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि गोपालतलाई, चौथिया, सोनोली और जामगांव को तत्काल वर्धा डेम की नहर से जोड़ा जाए तथा खेतों में सिंचाई के लिए नियमित जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिल सके। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे चौथिया पंखा पर उग्र आंदोलन और धरना प्रदर्शन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि आठ वर्षों बाद भी वर्धा सिंचाई परियोजना आसपास के दर्जनों गांवों के लिए वरदान नहीं बन सकी है। किसानों ने अपनी जमीनें परियोजना के लिए दीं, लेकिन आज भी वे बची हुई भूमि में सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं। वहीं, अधिकारियों की मिलीभगत से बिना समुचित नाप-तोल के निजी कंपनियों को पानी दिए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं हमने इस संबंध में जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को फोन लगाकर बात करनी चाहिए तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया।
ज्ञापन सौंपने वालों में जनपद सदस्य अजय बारस्कर, उपसरपंच संदीप बारस्कर, जयदीप धोटे, सुनील कोहरे, नवनीत चंदेल, कृष्ण झरबड़े, बंधु ठाकरे, मनीराम मगरदे, प्रकाश झरबड़े, कुंडलीक राव, संजीव गणेशे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे।

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