TAPTI परिक्रमा पदयात्रा का महाराष्ट्र में हुआ प्रवेश, आज होंगे ताप्ती पूर्णा संगम पर निहारेंगे चांगदेव मंदिर

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मुलताई – मां ताप्ती का गुणगान करते हुए ताप्ती सरोवर से प्रारंभ हुई मां ताप्ती सम्पूर्ण परिक्रमा पदयात्रा शुक्रवार को महाराष्ट्र प्रदेश में प्रवेश कर चुकी हैं। लगातार प्रतिदिन लगभग 30 किमी चलकर पदयात्री महाराष्ट्र प्रदेश के ग्राम भोखरी रात्रि विश्राम स्थल पर पहुंची।

यह जानकारी देते हुए राजू पाटनकर,लखमीचंद अग्रवाल ने बताया कि बीते तीन वर्षो से मां ताप्ती जी की सम्पूर्ण परिक्रमा पदयात्रा प्रारम्भ है जो ताप्ती नदी के दक्षिण तट से चलकर समुंद्र संगम पहुंच कर बोट (नाव) के द्वारा समुंद्र पार कर हजीरा पहुंचते है। तत्पश्चात हजीरा गणेश मन्दिर से परिक्रमा पदयात्रा का वापसी के लिए श्री गणेश होता है। जो 5 मार्च को पैदल ही मुलताई पहुंचती है। जहा हजारों ताप्ती भक्तो, संतगण, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिकों अतिथियों की उपाथिति में विधि विधान से यात्रा का समापन पूजन कर यात्रा का समापन समारोह किया जाता है। सुनिल वानखेड़े और प्रमोद जैन ने बताया कि मां ताप्ती के भक्त आए दिन मुलताई से निकलकर परिक्रमा पदयात्रा में शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को भी 6 भक्तो का जत्था उमरधा में पहुंचकर परिक्रमा यात्रा में शामिल हुआ।

वर्तमान समय में लगभग 55 भक्त परिक्रमा पदयात्रा में शामिल है।दल प्रभारी विशाल सिंह और संतोष कुमार आर्य ने बताया कि इस वर्ष बिगड़े मौसम में भी पदयात्रियों का उत्साह कम नही हुआ जबकि आधे पदयात्रियों की आयु 60 वर्ष के पार है जो निरंतर कदमताल बढ़ाते हुऐ नए पदयात्रियों का मार्गदर्शन करते ग्रामिणो को मां ताप्ती की महिमा से भी अवगत कराया जा रहा है।

आज पदयात्री एतिहासिक पुरातत्वीय चंगदेव मदिर के करेगें दर्शन

मां ताप्ती का गुणगान करते हुए धर्मध्वजा और जल कलश लेकर परिक्रमा पदयात्रा कर रहे भक्त गण धर्म साहित्य में उल्लेखित सबसे ज्यादा आयु को जीने वाले संत चांगदेव महाराज के दर्शन करेगें पदयात्री दलाजी राऊत और बालकृष्ण मालवीय ने बताया कि चांगदेव मदीर में बड़े बड़े घने काले प्राचीन पत्थरो से निर्मित बहुत बड़ा मंदिर है। जहां दूर-दूर से लोग दर्शन को आते हैं भुसावल के पास यह सबसे बड़ा दर्शनीय तीर्थ स्थल है
ताप्ती पूर्णा संगम को निहारेंगें पदयात्री।

राजू पाटनकर ने बताया कि चांगदेव महाराज मन्दिर मूलतः ताप्ती पूर्णा नदी के संगम स्थल पर विराजमान हैं जहां महाराष्ट्र प्रदेश के नामचीन बांध हथनुर (धरण) का बेक वाटर का नजारा देखते ही बनता है यहां पूर्णा नदी को नाव से पार करने में लगभग आधा घंटा बोटिंग करके चांगदेव जाना पड़ता है। जो बहुत ही रोमांचित यात्रा का अनुभव देती है। शनिवार को दोपहर 4 बजे सभी परिक्रमा पदयात्री इस रोमांचित यात्रा के साक्षी बनेंगे और रात्रि विश्राम संत मुक्ता माई संस्थान मेहूंन में होगा।


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