मुलताई नगर पालिका में अब भी मचा है राजनैतिक घमासान, किसको क्या मिला ये अंदर की बात है

0
894

असलम अहमद

मुलताई -क्षेत्र की राजनीति को अजब परिणामों और गजब घटनाक्रमों के लिए जाना जाता है और मुलताई क्षेत्र की राजनीति ने यह रोचकता हमेशा बनाए रखी है।

फिलहाल नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष चुनाव हुए लगभग 1 माह बीत चुका है किंतु परिणाम आज भी रोज आ रहे हैं। रोज आने वाले इन परिणामों में किसको क्या मिला यह अंदर की बात है किंतु अब यह तय हो गया है कि भाजपा के 9 पार्षदों में से अब 6 पार्षद शेष रह गए है ।

नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार के पास परिषद में पूर्ण बहुमत हो गया है। अध्यक्ष चुने जाने के बावजूद अब तक यह माना जा रहा था कि परिषद में नीतू परमार के समर्थन में कुल 7 ही पार्षद होंगे और विपक्ष में 8 किंतु भाजपा ने कार्यवाही कर नीतू परमार की यह समस्या समाप्त कर दी अब उनके पास 9 पार्षदों का पूर्ण बहुमत है। और कांग्रेस ने हारी बाजी को जीता भी और भाजपा के एक खेमे का खुला समर्थन भी प्राप्त कर लिया। जिसका असर विधानसभा में भी दिखाई देगा।

इस घटनाक्रम में क्या कुछ ऐसा है जो दिखाई नहीं दे रहा

भाजपा ने वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद परमार एवं उनकी पत्नी नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार को 6 साल के लिए भाजपा से निष्कासित कर दिया है और सुभाष वार्ड और नेहरू वार्ड के पार्षद पंजाब चिकाने एवं रितेश विश्वकर्मा ने स्वेच्छा से भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। इसी क्रम में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हेमंत शर्मा एवं भाजपा नेता भीम सिंह चंदेल को भी भाजपा ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है, ऐसे समय में जबकि आगामी विधानसभा की बिसात बिछाए जाने लगी है।

भाजपा की इस उठापटक और खींचतान के परिणाम क्या होंगे इसका निर्धारण तो समय के साथ होगा किंतु इस कार्यवाही के बाद एक खेमा पूरी तरह से भाजपा से स्वतंत्र हो गया है। हमने जब भाजपा कार्यकर्ताओं से चर्चा की तो उनका कहना था कि मुलताई नगर पालिका में अगर भाजपा के विपरीत परिणाम आए हैं तो इसकी जवाबदेही जिला नेतृत्व ने भी लेनी चाहिए जो समय रहते परिस्थितियों को भाप ना सके। राजनीतिक विश्लेषण कर्ताओ की माने तो इस पूरे घटनाक्रम में कुछ ऐसा तो है जो खुली आंखों से दिखाई नहीं दे रहा है और हारने और जीतने वाले दोनों को बीते घटनाक्रम का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here