3 साल की न्यायिक लड़ाई, 8  फैसले के बाद नीतू परमार बनेगी मुलताई नपा अध्यक्ष,

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मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस की नीतू परमार और भाजपा की वर्षा गड़ेकर के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद पर आखिरकार विराम लग गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले में नीतू परमार के पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें अध्यक्ष पद का कार्यभार सौंपने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस फैसले के बाद मुलताई की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार कांग्रेस पदाधिकारियों एवं समर्थकों के साथ नगर पालिका कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने अध्यक्ष पद का प्रभार लेने की प्रक्रिया शुरू करते हुए प्रशासन को आवश्यक दस्तावेज सौंपे। मुख्य नगर पालिका अधिकारी को सौंपा आवेदन कार्यालय पहुंचने पर नीतू परमार ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी वीरेंद्र तिवारी को न्यायालय के आदेश की प्रति सौंपी। साथ ही उन्होंने औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करते हुए अध्यक्ष पद का प्रभार सौंपने की मांग की। परमार ने कहा कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार उन्हें तत्काल पदभार दिया जाना चाहिए।

इस दौरान कांग्रेस पार्षद अंजलि शिवहरे, वंदना साहू, शिव माहोरे सहित वरिष्ठ नेता किशोर सिंह परिहार, अरुण यादव, लोकेश यादव एवं नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुमित शिवहरे समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए नीतू परमार के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

“सत्य की जीत हुई है” – नीतू परमार “मैं पहले भी सत्य के साथ थी और आज भी हूं। न्यायालय का यह निर्णय सत्य की जीत है। अब मेरी पहली प्राथमिकता नगर के विकास कार्यों को गति देना होगी।”नीतू परमार

मैं न्यायालय के फैसले का स्वागत करती हूं और जहां तक इस फैसले के खिलाफ पनः न्यायालय में जाने का सवाल है। भाजपा संगठन का जो भी आदेश होगा वैसा निर्णय लिया जाएगा। वर्षा गडेकर अध्यक्ष नगर पालिका मुलताई

मुलताई  मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर पिछले लगभग तीन वर्षों से चल रहा कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में नीतू परमार के निर्वाचन को वैध ठहराते हुए उन्हें पुनः अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने की अनुमति दे दी है। क्या था पूरा विवाद नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर नीतू परमार और वर्षा गढ़ेकर के बीच विवाद शुरू हुआ था। चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देते हुए मामला पहले स्थानीय न्यायालय पहुंचा, जहां से  हाई कोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा न्यायालयों के प्रमुख आदेश (टाइमलाइन)

इस पूरे प्रकरण में अब तक करीब 8 प्रमुख न्यायिक एवं प्रशासनिक आदेश पारित हुए, जिनमें विभिन्न स्तरों पर निर्णय बदलते रहे। अंतिम निष्कर्ष नीतू परमार का चुनाव पूरी तरह वैध घोषित,जिला न्यायालय का आदेश निरस्त,लंबा कानूनी विवाद समाप्त,मुलताई नगर पालिका को स्थायी नेतृत्व मिला,क्या मायने हैं इस फैसले के इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए गए विवादों का अंतिम निपटारा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से हुआ। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामले का शीघ्र समाधान संभव हो सका।खबर एवं रिसर्च सोशल मीडिया एवं ai आभार

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