तीन प्रदेश 63 दिन में मां ताप्ती का संदेश पहुंचा कर होगा यात्रा समापन
मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई स्थित श्री क्षेत्र ताप्ती मंदिर से प्रतिवर्ष निकलने वाली मां ताप्ती संपूर्ण परिक्रमा यात्रा का शुभारंभ गुरुवार को विधि-विधान और धार्मिक उत्साह के साथ किया गया। प्रातःकाल बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं परिक्रमा यात्री गाजे-बाजे के साथ ताप्ती मंदिर पहुंचे, जहां मां ताप्ती की पूजा-अर्चना के पश्चात पदयात्रा सूर्यकुंड होते हुए अपने गंतव्य की ओर रवाना हुई। पदयात्रा के नगर से गुजरने के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मां ताप्ती रथ पर पुष्पवर्षा की गई तथा भव्य स्वागत किया गया। यात्रा में हजारों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। नगर के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने रथ में विराजित मां ताप्ती एवं पावन ताप्ती जल कलश की पूजा-अर्चना की। नागरिकों द्वारा पदयात्रियों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया गया।
15 दिन पूर्व से होती है यात्रा की तैयारी
मां ताप्ती के उद्गम स्थल से निकलने वाली इस परिक्रमा यात्रा को आज नगर में पर्व के रूप में मनाया जाता है। प्रारंभ में यह यात्रा छोटे स्वरूप में होती थी, जो अब विशाल धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है। वर्तमान में इसकी तैयारियां लगभग 15 दिन पूर्व से प्रारंभ हो जाती हैं। प्रचार-प्रसार, व्यवस्थाओं एवं मार्ग नियोजन को लेकर बैठकों का दौर चलता है। इस वर्ष भी यात्रा के आवाहन हेतु एक दिन पूर्व ध्वज यात्रा निकाली गई। शिक्षक संघ द्वारा सभी पदयात्रियों का पंजीयन किया गया तथा पहचान पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही क्रिश्चियन मेमोरियल हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा यात्रा में शामिल पदयात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

तीसरे पड़ाव की ओर रवाना हुई परिक्रमा यात्रा
ताप्ती मंदिर से निकली परिक्रमा यात्रा का प्रथम पड़ाव मरही माता मंदिर रहा, जहां मंदिर समिति द्वारा यात्रा का भव्य स्वागत कर श्रद्धालुओं को भंडारा प्रसादी वितरित की गई। नगर के मध्य से गुजरते समय श्रद्धालुओं द्वारा यात्रियों के लिए पेयजल, चाय एवं बिस्किट की व्यवस्था की गई। इसके पश्चात पदयात्रा दूसरे पड़ाव ज्ञानेश्वर शिव मंदिर पहुंची, जहां मंदिर समिति द्वारा यात्रियों के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई। प्रसादी ग्रहण करने के बाद परिक्रमा यात्री तीसरे पड़ाव की ओर रवाना हुए।

63 दिन में ताप्ती-समुद्र संगम पहुंचेगी परिक्रमा
2 जनवरी को ताप्ती मंदिर से प्रारंभ हुई यह संपूर्ण ताप्ती परिक्रमा यात्रा मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमाओं से गुजरते हुए गुजरात के डुमस पहुंचेगी, जहां खंभात की खाड़ी में ताप्ती नदी का समुद्र से संगम होता है। वहां मां ताप्ती की पूजा-अर्चना के साथ यात्रा का विधिवत समापन किया जाएगा। इसके उपरांत 63 दिनों बाद, 4 मार्च को सभी पदयात्री पुनः मुलताई पहुंचेंगे, जहां ताप्ती तट पर संपूर्ण ताप्ती परिक्रमा यात्रा के समापन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

