पिता-बेटे की हिरासत में हत्या पर 9 पुलिसकर्मियों को फांसी,एक करोड चालीस लाख का अर्थ दंड,

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मदुराई/तमिलनाडु।छह साल पहले पुलिस हिरासत में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। एक पिता और उसका बेटा—जिनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने लॉकडाउन में दुकान देर तक खुली रखी—उन्हें कानून के रखवालों ने ऐसी यातनाएं दीं कि उनकी जिंदगी ही छीन ली गई। अब, वर्षों के इंतजार, संघर्ष और पीड़ा के बाद आखिरकार न्याय ने अपनी आवाज बुलंद की है।

मदुराई की अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई साथ ही  आरोपियों को  1करोड़ 40 लाख रुपए मुआवजा भी देना होगा।
अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए कहा कि यह सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है। वह दर्द जो देश ने महसूस किया जून 2020 की वह रात… जब एक पिता और उसका बेटा पुलिस हिरासत में थे— परिवार को उम्मीद थी कि वे सुबह घर लौटेंगे। लेकिन जो लौटा, वह था उनकी मौत का समाचार।
पोस्टमार्टम और जांच में सामने आया कि दोनों को बेरहमी से पीटा गया, ऐसी यातनाएं दी गईं जो इंसानियत को शर्मसार कर दें।

इस फैसले को केवल सजा नहीं, बल्कि एक संदेश माना जा रहा है: वर्दी के पीछे छिपकर अत्याचार करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा, कानून से ऊपर कोई नहीं—चाहे वह पुलिस ही क्यों न हो, आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है, परिवार को मिला सुकून पीड़ित परिवार, जो वर्षों से न्याय की आस में था, ने कहा— “आज हमें लगा कि हमारे अपनों की आत्मा को शांति मिली है।” लेकिन यह भी सच है कि यह सजा उनके दर्द को पूरी तरह मिटा नहीं सकती।

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