पारदी हत्या कांड में पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे,  राजा पवार सहित 14 आरोपी बरी,

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शुक्रवार को सुनाए गए इस फैसले के साथ ही करीब दो दशकों से न्यायालय में लंबित यह बहुचर्चित मामला समाप्त हो गया। 2008 में चौथिया गांव में हुई थी सनसनीखेज घटना
यह मामला वर्ष 2008 में बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र के चौथिया गांव का है।
उस समय पारदी समुदाय के डेरे में हिंसा और आगजनी की घटना सामने आई थी। घटना के बाद बोंदर पारदी और उनकी पत्नी के शव गांव के एक कुएं से बरामद किए गए थे। इस दोहरे हत्याकांड ने उस समय पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

इस दौरान अदालत में कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जांच की गई। हालांकि लंबी सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके चलते अंतिम निर्णय के समय अदालत ने 14 आरोपियों के विरुद्ध ही फैसला सुनाया। साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपी दोषमुक्त शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सभी 14 आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के साथ ही करीब 18 वर्षों से लंबित यह बहुचर्चित मामला समाप्त हो गया।

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता वी.के. सक्सेना और संजय रावत ने अदालत में पैरवी की। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय दिया है।वहीं फैसले के बाद आरोपियों के समर्थकों ने इसे “सत्य की जीत” बताते हुए खुशी जाहिर की और राहत की सांस ली।लंबे समय तक चर्चा में रहा मामला पारदी दंपती हत्याकांड बैतूल जिले में लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना रहा। अब अदालत के फैसले के बाद इस बहुचर्चित प्रकरण का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया है, हालांकि इस मामले को लेकर क्षेत्र में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना बनी हुई है।

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