धूमधाम से मना बाबा रामदेव का तृतीय स्थापना दिवस, बसंत पंचमी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब,

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इस अवसर पर मुलताई सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दरबार में मत्था टेकने पहुंचे। पूरे दिन नगर में भक्ति और उत्सव का वातावरण बना रहा।
भजनों के साथ निकली भव्य ध्वज निशान यात्रा उत्सव की शुरुआत शुक्रवार सुबह ताप्ती तट स्थित जगदीश मंदिर से हुई, जहां से बाबा रामदेवजी की भव्य ध्वज निशान यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों की थाप और बाबा के भजनों पर झूमते श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।


‘जय बाबेरी’ और ‘बाबा रामदेवजी की जय’ के जयकारों से पूरा मार्ग गूंज उठा। यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बैतूल रोड स्थित बाबा रामदेव मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने बाबा के चरणों में निशान (ध्वज) अर्पित किए। समाज सुधारक और लोक देवता के रूप में पूज्य बाबा रामदेव इस अवसर पर श्रद्धालु नीलेश अग्रवाल, रूपेश खंडेलवाल एवं गणेश साहू ने बाबा रामदेवजी की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है

उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्गों की सेवा में समर्पित कर दिया तथा समाज में फैली छुआछूत जैसी कुरीतियों का कड़ा विरोध किया। यही कारण है कि आज वे ‘पीरों के पीर’ के रूप में पूजे जाते हैं और उनके प्रति लोगों की गहरी आस्था है। हवन-पूजन, महाआरती और विशाल भंडारे का आयोजन स्थापना दिवस के अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह 10 बजे विशेष हवन-पूजन एवं महाआरती का आयोजन किया गया।

पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने नगर की सुख-समृद्धि की कामना की।
दोपहर 2 बजे से बैतूल रोड स्थित अरिहंत लॉन के समीप विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जो देर शाम तक चलता रहा। भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति एवं स्थानीय नागरिकों का विशेष योगदान रहा।

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