संजय द्विवेदी
बैतूल जिले के आदिवासी विकासखंड घोड़ाडोंगरी की ग्राम पंचायत रामपुर के दानवाखेड़ा गांव में दूषित पेयजल की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। हालात इतने खराब हैं कि गांव के आदिवासी बच्चे एक बार फिर खुजली और त्वचा रोगों की चपेट में आ गए हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि इससे पहले भी दूषित पानी के कारण दो मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जिससे गांव में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। आश्वासन ही मिला, जमीन पर नहीं दिखा काम ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से साफ पेयजल की व्यवस्था की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
20 जनवरी को श्रमिक आदिवासी संगठन और समाजवादी जन परिषद के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। उस दौरान प्रशासन ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। श्रमिक आदिवासी संगठन के राजेंद्र गढ़वाल के अनुसार, प्रशासन के आश्वासन के बावजूद गांव में अभी तक हैंडपंप नहीं लगाया गया है। पिछले दो महीनों से ग्रामीण खुजली और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं। वहीं समाजवादी जन परिषद के अनुराग मोदी ने बताया कि गांव की मीना बाई, रीना बाई, सतीश (पिता मंगल धुवे) और कस्तूरिया बाई गंभीर रूप से प्रभावित हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

मूलभूत सुविधाओं से वंचित गांव दानवाखेड़ा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से दूर है। यहां न आंगनवाड़ी है, न सड़क, न बिजली, न स्वच्छ पेयजल, न स्कूल और न ही नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारियों ने हैंडपंप खुदाई के लिए मार्ग तैयार करने को कहा था, जिसे ग्रामीणों ने श्रमदान से पूरा भी कर दिया। इसके बावजूद एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी खुदाई कार्य शुरू नहीं किया गया। बीमारियों का बढ़ता खतरा
दूषित पानी के कारण पिछले दो महीनों से गांव में खुजली और त्वचा रोगों का प्रकोप जारी है, जिससे खासकर बच्चे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

